अयोध्या के रामजन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट के गठन की कारवाई केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है. उधर इसपर राजनीति भी शुरू हो चुकी है, विभिन्न समूह और व्यक्ति ट्रस्ट में स्थान पाने या उसपर अपने बर्चस्व के लिए सक्रिय हो चुके हैं. मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों, समूहों द्वारा इस पर भिन्न- भिन्न राय सामने रखे जा रहे हैं. इस बीच केंद्र और राज्य सरकार अयोध्या को एक आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है.
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बुधवार को उम्मीद जताई कि बनने वाला ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण रामजन्मभूमि न्यास द्वारा तैयार डिजाइन के अनुरूप ही करेगा. जिसने अयोध्या के कारसेवकपुरम में 1990 से ही कलाकारों और शिल्पकारों की कार्यशाला चला रहा है. इसमें कलाकारों ने इस उम्मीद के साथ पत्थरों और खंभों पर कलाकृतियां उकेरी हैं, कि जब भी राम लला का मंदिर बनेगा तो इन्हें उसमें लगाया जाएगा. अभी तक मंदिर निर्माण के लिए 65% पत्थर तराशे जा चुके हैं.
VHP के प्रवक्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि 212 खम्भों पर 268 फुट लंबे, 140 फुट चौड़े और 128 फुट उंचे मन्दिर को बनाने वाले ट्रस्ट में न्यास का प्रतिनिधित्व भी रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत के गृह मंत्री अमित शाह और UP के CM योगी आदित्यनाथ को भी इस ट्रस्ट में रखा जाना चाहिए. जबकि एक दिन पूर्व ही VHP के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा था कि ट्रस्ट में किसी भी मंत्री को नहीं रखा जाना चाहिए.
रामलला विराजमान का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करने वाले त्रिलोकी नाथ पांडेय के अनुसार सरकार ट्रस्ट का गठन करे पर इसका अध्यक्ष जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास को बनाया जाना चाहिए. आवश्यकतानुसार इसमें सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण VHP के प्रस्तावित मॉडल पर किया जाये और इसमें VHP द्वारा तराशे गए पत्थरों का इस्तेमाल किया जाए. मंदिर निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं किया जाये, ट्रस्ट गठन के बाद मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समुदाय से धन इकट्ठा किया जाना चाहिए.
राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने 13 नवम्बर को ही कहा कि राम मंदिर के लिए अलग से ट्रस्ट बनाने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही एक ट्रस्ट है. इसमें आवश्यकतानुसार नए सदस्यों को शामिल किया जा सकता है.
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार नया ट्रस्ट बनाए. नयी ट्रस्ट में राम जन्मभूमि न्यास के लोगों का भी उसमें प्रतिनिधित्व हो.
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कोर्ट के आदेशानुसार ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए. हम स्वयं एक ट्रस्ट है. हमारे सदस्य फैसला करेंगे कि नवगठित ट्रस्ट में शामिल होना है या नहीं.
रामजन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण से इतर केंद्र और राज्य सरकार “अयोध्या तीर्थ विकास परिषद” का गठन कर अयोध्या को एक आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की एक बड़ी योजना बनाने में लगी है. अयोध्या में सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 251 मीटर की विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति लगाने की योजना अंतिम रूप ले चुकी है. अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने और अप्रैल 2020 में राम नवमी से उड़ान प्रारम्भ करने पर काम कर रही है. सौ करोड़ रूपए व्यय कर अयोध्या रेलवे स्टेशन के विस्तार एवं सौंदर्यीकरण की योजना बन रही है. सरयू नदी में क्रूज (पानी का छोटा जहाज) चलाने पर काम चल रहा है. अयोध्या में भगवान राम से जुड़े सभी कुंडों का पुर्निर्माण करने, अयोध्या से फैजाबाद के बीच 5 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाने, पांच फाईव स्टार होटल तथा दस बड़े- बड़े रिजार्ट बनाने का काम शुरू होने वाला है. वहाँ गौशाला, धर्मशाला, वैदिक संस्थान के साथ ही अयोध्या में दस श्रीराम द्वार बनाए जाएंगे.


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