अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के ताजे अनुमान के अनुसार वर्ष 2019 और 2020 के दो वर्षों के दौरान चीन की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर एक फीसदी अधिक रहेगी. भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2019 में 7.5 प्रतिशत और 2020 में 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि चीनी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दोनों साल के दौरान 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
आर्थिक मोर्चे पर चीन के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के साथ व्यापार मुद्दे पर चीन की तनातनी है, जो सीधे तौर पर चीन को भारी पड़ने लगी है. विगत 28 साल में पहली बार चीन की आर्थिक विकास दर सबसे कम रफ्तार से बढ़ी है. साल 2018 में चीन की अर्थव्यवस्था 6.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ी है. चीन के सरकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो ने भी कहा है कि वर्ष 2017 में जीडीपी 12,130 अरब डॉलर रही, जो पूर्वानुमान से 93.90 अरब डॉलर कम है.
जनवरी के अपने वैश्विक अर्थव्यवस्था परिदृश्य अपडेट में इम्फ ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था रफ्तार पकडे़गी. इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में कमी और मुद्रास्फीतिक दबाव कम होने से मौद्रिक रुख का नरम होना रहेगा.
ताजा रिपोर्ट में IMF ने कहा है कि वित्तीय प्रोत्साहन से चीन पर अमेरिका के ऊंचे शुल्कों के प्रभाव को कम करने में मदद जरुर मिली है, परन्तु इसके बावजूद वित्तीय नियामकीय रुख में सख्ती और अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर तनाव के चलते चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त रहेगी. साथ ही उभरते और विकासशील एशिया में वृद्धि दर 2018 के 6.5 प्रतिशत से घटकर 2019 में 6.3 प्रतिशत रहेगी और 2020 में 6.4 प्रतिशत होगी. ज्ञात है कि 2017 में चीन की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही थी, जबकि उस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की दर से ही बढ़ी थी. IMF ने कहा कि हाल के बरसों में जहां चीन की वृद्धि दर नीचे आ रही है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था ऊपर की ओर चढ़ रही है.
IMF ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2018 में 7.3 प्रतिशत रही. रिपोर्ट के अनुसार भारत 2019 में 7.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर के बल पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ देगा. इसके पूर्व वैश्विक सलाहकार कंपनी PWC ने भी कहा था कि भारत 2019 में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ वैश्विक रैंकिंग में पांचवे स्थान पर आया सकता है. उसने यह भी कहा था कि इस सूची में ब्रिटेन और फ्रांस लगातार आगे पीछे होते रहते हैं. लेकिन यदि भारत इस सूची में एक बार आगे निकलता है तो उसका स्थान स्थायी रहेगा.



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