सेबी ने प्रमोटर प्रणब रॉय और राधिका रॉय को शेयर मार्केट की गतिविधियों में भाग लेने या एनडीटीवी में प्रबंधकीय पद संभालने से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. साथ ही वो एक साल तक किसी भी कंपनी के मैनेजेरियल पोस्ट पर नहीं रहेंगे.
उधर राधिका रॉय और प्रणय रॉय (आरआरपीआर) का मानना है कि सेबी का आदेश बिल्कुल असामान्य, विकृत एवं गलत आंकलन पर आधारित है, दोनों अगले कुछ दिनों में कानूनी कदम उठाएंगे.
सेबी ने कहा कि दोनों ने आईसीआईसीआई बैंक और दिल्ली की एक होलसेल ट्रेडिंग कंपनी विश्वप्रधान कामर्शियल प्राइवेट लि. के साथ किए लोन अग्रीमेंट से जुड़ी सूचनाएं जाहिर नहीं कीं. सेबी को 2017 में एक शेयरधारक क्वांटम सिक्यॉरिटीज से शिकायत मिली थी कि कम्पनी के प्रमोटरों ने लोन अग्रीमेंट के मीटीरियल इन्फार्मेशन का खुलासा नहीं करके नियमों का उल्लंघन किया है. सेबी ने इस शिकायत पर अक्टूबर 2008 से नवंबर 2017 के दौरान कम्पनी के गतिविधियों की जांच की जब रॉय दंपती आरआरपीआर होल्डिंग्स कम्पनी के प्रमोटर थे.
सेबी ने कहा कि प्रमोटरों ने कुल तीन लोन अग्रीमेंट किए, एक आईसीआईसीआई बैंक के साथ और दो वीसीपीएल के साथ. इन एग्रीमेंट्स में मीटीरियल और प्राइस सेंसिटिव इन्फर्मेशन थे. सेबी ने पिछले साल वीसीपीएल को निर्देश दिया था कि वह आरआरपीआर होल्डिंग्स को ओपन ऑफर दे, क्योंकि उसने लोन एग्रीमेंट्स के जरिए कम्पनी पर पिछले दरवाजे से नियंत्रण हासिल किया है. तब वीसीपीएल ने सेबी से कहा कि उसने तो रिलायंस स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टमेंट लि. से लोन दिलाया था जो रिलायंस इंडस्ट्री लि. (आरआईएल) की सब्सिडियरी है.
सेबी ने अपने 51 पेज के फैसलों में कहा है कि ये सारी जानकारियां महत्वपूर्ण थीं, अगर आरआरपीआर होल्डिंग्स के निवेशकों को इसकी जानकारी होती तो उनका मन बदल सकता था. इस प्रकार आरआरपीआर होल्डिंग्स (एनडीटीवी) के संस्थापकों ने कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन किया है. सेबी ने इसे छोटे निवेशकों के साथ धोखा माना. लोन की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को भी नहीं दी गयी जिससे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हित प्रभावित हुए.
ज्ञात है की एक सप्ताह पूर्व भ्रष्टाचार और पेशेवर कदाचार के आरोप में आयकर विभाग के जिन 12 वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया था उनमें एक कमिश्नर संजय कुमार श्रीवास्तव भी शामिल हैं. ये व्ही अधिकारी हैं जिन्होंने सबसे पहले 2006 में NDTV के खिलाफ मामला उठाया था. उन्होंने प्रणब रॉय, पी चिदम्बरम एवं मुकेश अम्बानी के इस घालमेल को सतह पर लाने के क्रम में लगातार यातनाएं झेलीं. उनके विरुद्ध डेढ़ दर्जन से अधिक जाँच हुयी. उनके विरुद्ध सेक्सुयल ह्रासमेंट का घिनौना आरोप तक लगाया गया. इस आरोप में चली विभागीय जाँच में आरोप लगाने वाली एक विभागीय महिला के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज करने तक का आदेश निकल चुका था.
संजय कुमार श्रीवास्तव की बर्खास्तगी अपने आप में एक बड़ा मामला है और जानकारों का मानना है कि 2014 में भले ही प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नरेंद्र मोदी बैठ गये हों और 2019 में पुनः जनता ने भारी बहुमत से देश की बागडोर उन्हें सौंपी हो. परन्तु क्या केन्द्रीय वित्त मंत्रालय आज भी पी चिदम्बरम, मुकेश अम्बानी और प्रणब रॉय जैसों की हाथ का कठपुतली मात्र नहीं है? क्या सेक्सुयल ह्रासमेंट मामले में 22 मई 2019 को निकले विभागीय आदेश की जानकारी वित्त मंत्रालय ने PMO को दी थी? क्या उस आदेश के बाद भी एसके श्रीवास्तव की बर्खास्तगी की जा सकती है? क्या 350 करोड़ रूपये का क़र्ज़ बगैर ब्याज के रिलायंस ने नहीं दिए थे? क्या RR जो PR की पत्नी हैं, देश के एक बड़े वामपंथी नेता की बहन नहीं हैं? क्या यह पूरा मामला कांग्रेस, वामपंथ, ब्यूरोक्रेट, उद्योगपतियों और मिडिया की मिलीभगत का नहीं है?
सवाल बहुत हैं…… जवाब तो देने ही होंगे….


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