PNB : नीरव मोदी की कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार

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PNB फ्रॉड में एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट श्याम सुंदर वधवा को मुंबई से गिरफ्तार किया। मामले में ईडी ने पहली गिरफ्तारी की है। इससे पहले ईडी ने 24 मार्च को नीरव के मुंबई स्थित घर से 36 करोड़ का सामान जब्त किया था। बता दें कि 13,500 करोड़ रुपए के PNB फ्रॉड में नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप के मालिक मेहुल चौकसी आरोपी हैं। ये दोनों फरवरी में फ्रॉड के खुलासे से पहले ही देश छोड़कर भाग गए।
वधवा पर नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार इंटरनेशन और फायरस्टार डायमंड इंटरनेशल के लिए फर्जी ट्रांजेक्शन करने का आरोप है। फर्जी ट्रांजेक्शन करने वाली कंपनियों में नीरव की डायमंड आर यूएस, स्टेलर डायमंड और सोलर एक्सपोर्ट भी शामिल हैं। ईडी उससे पूछताछ कर रही है।
ईडी ने 24 मार्च को नीरव के मुंबई स्थित घर पर छापेमारी की थी। यहां से एजेंसी ने 10 करोड़ रुपए कीमत की हीरे की अंगूठी, एमएफ हुसैन, अमृता शेरगिल, केके हेब्बार की पेंटिंग समेत 36 करोड़ का सामान जब्त किया था। ईडी देश भर में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के ठिकानों पर 251 छापे मार चुकी है। इसमें करीब 7,638 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी अटैच की गई। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ लुकआउट/ब्लू कॉर्नर नोटिस के साथ गैरजमानती वारंट भी जारी हो चुके हैं। दोनों के पासपोर्ट रद्द कर दिए गए हैं।


सीबीआई ने 6 मार्च को गीतांजलि जेम्स के वाइस प्रेसिडेंट विपुल चितालिया को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में जांच एजेंसी ने कहा था कि चितालिया ही पीएनबी फ्रॉड का मास्टरमाइंड है। इससे पहले सीबीआई फायरस्टार के प्रेसिडेंट (फाइनेंस) विपुल अंबानी को गिरफ्तार कर चुकी है। विपुल अंबानी रिलायंस ग्रुप के प्रमुख मुकेश अंबानी का चचेरा भाई है। मामले में ईडी और सीबीआई नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों के कई अन्य अधिकारियों के साथ ही पीएनबी के ऑडिटर्स से भी पूछताछ कर चुकी है।
ईडी नीरव मोदी को तीन समन भेज चुकी है, लेकिन वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हुआ। अब ईडी नीरव और मेहुल के प्रत्यर्पण के प्रयास कर रही है। साथ ही ईडी दोनों आरोपियों की विदेशों में मौजूद प्राॅपर्टी की जांच कर उसे जब्त करने की कोशिश कर रही है।
फ्रॉड की शुरुआत पीएनबी की मुंबई की ब्रेडी हाउस ब्रांच में 2011 से हुई। इसका खुलासा इसी साल फरवरी के पहले हफ्ते में हुआ। फ्रॉड फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) के जरिए किया गया। 2011 से 2018 तक हजारों करोड़ की रकम विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई। एलओयू एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं।

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