दशरथ मांझी श्रम एवं अध्ययन संस्थान में आयोजित समारोह में ‘प्रधामंत्री श्रमयोगी मानधन योजना’ का औपचारिक शुभारंभ करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि असंगठित कामगारों के लिए केन्द्र सरकार की यह एक ऐसी पेंशन योजना है जिसमें 55 से 200 रुपये प्रतिमाह अंशदान करने वालों को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रतिमाह 3 हजार रुपये पेंशन मिलेगी। कामगार जितनी राशि अंशदान करेंगे, उतनी ही राशि हर महीने सरकार भी जमा करेगी। योजना के अन्तर्गत अल्प समय में बिहार के 33 हजार असंगठित कामगारों का निबंधन हो चुका है।
मोदी ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने बिहार के कुल 94.42 लाख गरीबों को बीमा का सुरक्षा कवच प्रदान किया है। बिहार में 4.12 करोड़ प्र.मं.जनधन खाताधारक के अलावा 66.29 लाख प्र.मं. सुरक्षा बीमा धारक व 28.13 लाख प्र.मं. जीवन ज्योति बीमा धारक हैं। अगर कोई जनधन खाताधारक दोनों बीमा योजनाओं में शामिल हैं तो उसकी मृत्यु के बाद उसके परिजनों को 6 लाख रुपये तक की सहायता राशि मिलेगी। शून्य जमा पर खुले जनधन खातों में बिहार के गरीबों ने 8,567 करोड़ रुपये जमा कराया है। जनधन खाताधारकों को स्वतः 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, बिना किसी शर्त के 2 हजार रुपये का कर्ज और कुछ निश्चित शर्तों के साथ 10 हजार तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है। बिहार में अटल पेंशन योजना के 12.29 लाख लाभार्थी है।
मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना के तहत जहां पूरे देश में साढ़े तीन करोड़ को 7.5 लाख करोड़ का ऋण दिया गया है वहीं बिहार के 26 लाख लोगों के बीच बैंकों ने 22,328 करोड़ वितरित किया है। सरकार विदेशों में फंसे मजदूरों को आने और दवा आदि के लिए 500-500 रुपये तथा अलग से 1500 यानी कुल 2500 रुपये देती है। श्रमिक कल्याण बोर्ड में निबंधित 12 लाख से ज्यादा निर्माण मजदूरों में से 1.80 लाख को 3 हजार की दर से चिकित्सा सहायता के तौर पर 54 करोड़ दिया जा चुका है और आज 78 हजार अन्य निर्माण मजदूरों को 23 करोड़ रुपये ट्रांसफर किया गया है। निर्माण मजदूरों की स्वभाविक मृत्यु सहायता राशि को 1 से बढ़ा कर 2 लाख कर दिया गया है।

सुशील मोदी ने मंगलवार को टवीट किया कि- “केन्द्र की सरकार भी चाहती है कि डिपार्टमेंट की जगह विश्वविद्यालय को इकाई मान कर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में आरक्षण लागू किया जाए। इसीलिए इलहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर किया। SLP खारिज होने के बाद केन्द्र सरकार ने पुनरीक्षण याचिका दायर की उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। प्रकाश जावेडकर ने पहले ही संसद को आश्वस्त किया था कि अगर पुनरीक्षण याचिका खारिज हो जाती है तो केन्द्र सरकार अध्यादेश लाकर एससी/एसटी, पिछड़ा और अति पिछड़ा के लिए पूर्व की तरह विश्वविद्यालयों को इकाई मान कर नियुक्ति में आरक्षण की व्यवस्था लागू करेगी।
विपक्ष को यह मालूम है कि अगले दो-तीन दिन में केन्द्र सरकार अध्यादेश लाने वाली है, इसलिए घड़ियाली आंसु बहाने व युवकों को गुमराह करने के लिए वह भारत बंद का नाटक कर रहा है जबकि उसका एक भी बड़ा नेता सड़कों पर नहीं दिखता है। केन्द्र सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए ही फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। बिहार में विश्वविद्यालयों को ही इकाई मान कर असिस्टेंट प्रोफेसर के तीन हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल भी रही है।



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