यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कैबिनट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया साथ ही पांच निगमों में उनके सात अध्यक्ष और सदस्यों को भी पदमुक्त कर दिया.
राजभर ने कहा कि हमने 13 अप्रैल को ही इस्तीफा दे दिया था. अब बर्खास्त किया जाए, या कुछ और हमें कोई फर्क नहीं पड़ता. योगी ने ओमप्रकाश के मंत्रालय का प्रभार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अनिल राजभर को सौंप दिया है.
ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के चेयरमैन, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के अध्यक्ष राणा अजीत सिंह, राष्ट्रीय एकीकरण परिषद से सुनील अर्कवंशी और राधिका पटेल, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के सदस्य से सुदामा राजभर के सैट ही उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग से गंगाराम राजभर और वीरेंद्र राजभर को भी हटा दिया गया है.
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि वो पिछड़ों के नहीं सिर्फ परिवार के नेता हैं. भाजपा के कारण विधायक और मंत्री बने, लेकिन उन्होंने पिछड़ों के हक की लड़ाई के नाम पर शुद्ध रूप से नाटक किया.
पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री राजभर आरक्षण के वर्गीकरण के मामले में लगातार भाजपा और मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते रहते थे. योगी और भाजपा सरकार के खिलाफ बयानबाजी के बाद राजभर ने अपनी पार्टी सुभासपा के टिकट पर पूर्वांचल की 39 सीटों पर उम्मीदवार भी उतार दिए थे. इनमें से पांच उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद राजभर ने एनडीए में रहते हुए विपक्षी दलों के प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था.



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