भारत भविष्य में ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) में शामिल हो सकता है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि हम बहुत खुश हैं कि भारत ने विशेष मेहमान के तौर पर OIC की बैठक में भाग लिया, यह एक शुरुआत है कि जब एक दिन भारत OIC का हिस्सा होगा.
सऊदी अरब के शहजादे ने कहा कि OIC की बैठक को सकारात्मक तरीके से देखना चाहिए और OIC देश भारत से मजबूत रिश्ते चाहते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी वो स्थिति नहीं आई है कि भारत OIC का हिस्सा बने, जिसका कारण हम सब जानते हैं. लेकिन भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने OIC में बहुत अच्छा भाषण दिया और इसके पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेंगे.
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक मार्च को हुयी OIC की बैठक में कहा कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई किसी मज़हब के ख़िलाफ़ नहीं है. जो देश चरमपंथ को पनाह देते हैं और उनका वित्त पोषण करते हैं, उन्हें निश्चित ही उनकी धरती से चरमपंथ शिविरों को समाप्त करने के लिए कहा जाना चाहिए. पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों पर भारत के हवाई हमले के तीन दिन बाद सुषमा स्वराज ने OIC के मंच से पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधा. ये पहला मौका था जब OIC ने भारत को विशेष अतिथि के तौर पर अपने सम्मेलन में आमंत्रित किया था. OIC में शुरू से सऊदी अरब का दबदबा और पाकिस्तान का बोलबाला रहा है.
उन्होंने कहा कि अगर हम मानवता को बचाना चाहते हैं, तो हमें निश्चित ही चरमपंथियों का वित्तपोषण करने वाले और उन्हें पनाह देने वाले देशों से उनकी धरती पर चरमपंथी शिविरों के ढांचों और पनाहगाहों को ख़त्म करने के लिए कहना चाहिए. क्योंकि यह एक महामारी है जो तेज़ी से फैलती जा रही है, जिसे अलग-अलग तरीके से चलाया जा रहा है. चरमपंथ के ख़तरे को सिर्फ़ सैन्य, ख़ुफ़िया या कूटनीतिक तरीकों से नहीं हराया जा सकता, बल्कि इसे हमारे मूल्यों की मज़बूती और धर्म के संदेश से जीता जा सकता है. यह सभ्यता और संस्कृति का टकराव नहीं है, बल्कि विचारों और आदर्शों के बीच प्रतिस्पर्धा है.”
भारतीय विदेश मंत्री ने आतंकवाद और कट्टरवाद दोनों को एक बताते हुए कहा था कि इस्लाम और कुरान का संदेश शांति है. साथ ही उन्होंने कहा कि “ऋग्वेद में कहा गया है कि भगवान एक है, लेकिन लोग अलग-अलग तरह से उसका बखान करते हैं. यही दुनिया के सभी धर्मों में भी कहा गया है.”
भारत को विशेष अतिथि के तौर पर OIC में बुलाए जाने की वजह से इसके संस्थापक सदस्यों में से एक पाकिस्तान ने इसमें भाग लेने से ही मना कर दिया था. जबकि भारत की नज़र में OIC पाकिस्तान के लिए एक ऐसा इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म रहा है जहां उस पर कोई रोकटोक नहीं रहा है. उसने इस मंच का जमकर दुरुपयोग किया है. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले के बाद तनाव अपने चरम पर रहने के समय OIC के मंच पर भारत की मौजूदगी काफी महत्वपूर्ण रही.
इसके पूर्व 19 फरवरी को सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान भारत आए थे और उसके पहले इस्लामाबाद गए थे. युवराज ने तब यहाँ पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि- “आतंकवाद और कट्टरपंथ का सवाल हमारी साझी चिंताएं हैं. मैं भारत को बताना चाहता हूँ कि हम आपके साथ पूरा सहयोग करेंगे, चाहे खुफिया जानकारी साझा करने की बात हो, न केवल भारत बल्कि पड़ोसी देशों के साथ भी.”


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