भारतीय नौसेना ने जमीन से हवा में मार करने वाली मध्‍यम दूरी की मिसाइल (MRSAM) का सफल परीक्षण किया और इसीके साथ इंडियन नेवी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जिनके पास यह विशिष्‍ट क्षमता है.
भारतीय नौसेना के INS कोच्चि और INS चेन्‍नई ने पश्चिमी समुद्र तट पर इसका सफल परीक्षण कर विभिन्‍न हवाई टारगेट को नष्ट कर दिया. यह मिसाइल 70 किमी के दायरे में आने वाली मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन, निगरानी विमानों के साथ ही हवाई चेतावनी व नियंत्रण प्रणाली को 360 डिग्री में घूमकर एक साथ कई को मार गिरा सकती है.
इस मिसाइल को डीआरडीएल हैदराबाद और डीआरडीओ ने इजरायल एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज के सहयोग से विकसित किया. भारतीय नौसेना के सभी युद्धपोतों में भविष्‍य में इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है. यह 70 किमी के दायरे में आने वाले दुश्मनों को किसी भी मौसम में मार गिराएगी. 14.76 फीट लंबी और 276 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल 360 डिग्री घूमकर साढ़े चौबीस सौ किमी प्रति घंटे की अधिक गति से दुश्मन पर वार करेगी.मला.
डीआरडीओ ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इजरायल एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज (IAI) के साथ 17 हजार करोड़ रुपये के करार किए हैं. इसके तहत 40 लॉन्चर्स और 200 मिसाइलें तैयार होनी हैं. अगले साल तक पहला सेट तैयार होने के साथ ही 2023 तक इनकी तैनाती भी हो जाएगी. आईएआई ने इसके बाद कहा था कि भारत और इजरायल के बीच यह सबसे बड़ा सिंगल कॉन्ट्रैक्ट है.
इससे पहले भारत ने रूस के साथ भी एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम की डील साइन की थी, जो देश को होस्टाइल जेट, बम, ड्रोन और मिसाइलों से बचा सकता है. एस-400 एक साथ 36 जगह टारगेट बना सकती है और एक साथ 72 मिसाइल लॉन्च कर सकती है.


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