भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए इसके विरुद्ध अभियान चलाने वाली राज्य सरकार के खनन विभाग में खुलेआम लूट मची हुयी है. रोहतास जिला खनन पदाधिकारी का कार्यालय लूट खसोट के नये- नये तरीके तक ईजाद करता रहता है.
ट्रक मालिकों ने जिला खनन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा अवैध वसूली के अजीबोगरीब किस्से सुनाये और बताये हैं. उन्होंने बताया की खनन निरीक्षक द्वारा पकड़ी गई ओवरलोडेड ट्रकों को छुड़ाने ज्योंही ट्रक मालिक खनन कार्यालय जाते हैं, अवैद्द वसूली प्रारम्भ हो जाती है. सबसे पहले विभागीय बड़ा बाबू द्वारा मनमाने तरीके से जुर्माने की रकम को लाखों में बताया जाता है. उसके साथ ही जुर्माने की रकम को कम करने का तरीका समझाते हुए हजारों रूपये की मांग सामने रखी जाती है.
यही नहीं खनन विभाग के जुर्माने की राशि का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से होता है और अधिकांश ट्रक मालिक या ड्राइवर स्थानीय नहीं होते. इसे भी नाजायज वसुली का एक साधन बना लिया गया है. खनन विभाग के बड़ा बाबु द्वारा ट्रक मालिक/ड्राइवर की इस मजबूरी का फायदा उठाने की भी पूरी व्यवस्था है. बड़ा बाबू डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए अपने एक एजेंट के पास भेज दिया जाता है. जहाँ ट्रक मालिकों/ड्राइवरों के बाहरी होने का लाभ उठाते हुए प्रति ड्राफ्ट उनलोगों से दो हज़ार से 5 हज़ार तक की अतिरिक्त राशि वसूली जाती है.
ट्रक मालिकों/ड्राइवरों के अनुसार जुर्माने की रकम जमा करने के बाद भी जब ट्रक विमुक्ति पत्र निर्गत करने की बात आती है तो पुनः कार्यालय द्वारा दो से पांच हजार रूपये तक की अवैध मांग सामने रखी जाती है, अन्यथा अनावश्यक रूप से विलम्ब किया जाता है. जिला खनन पदाधिकारी विकास पासवान और उनके निरीक्षक जब ट्रक को जुर्माना वसूलने के लिए पकड़ते हैं तो फिर उन्हीं के कार्यालय में जुर्माने की रकम कम कैसी हो जाती है यह यक्ष प्रश्न है. यही नहीं एक ओर जुर्माने की रकम घटा दी जाती है तो दूसरी ओर विभागीय कर्मियों की जेबें भारी होती हैं.
कुछ दिनों पूर्व गया का 4- 5 ट्रक पकड़ा गया था. उसके साथ भी यही सब दोहराए जाने पर ट्रक मालिक ने गया जिला जदयू अध्यक्ष एलेग्जेंडर खान से इसकी शिकायत की. एलेग्जेंडर खान द्वारा इस संदर्भ में सम्बन्धित उच्चाधिकारियों से बात भी की गयी पर परिणाम ‘वही ढ़ाक के तीन पात’. बताया जाता है कि रोहतास जिला खनन कार्यालय के प्रधान लिपिक मोहम्मद आसिफ अपनी पहुंच राजधानी तक बताकर कार्यालय में अपनी धौस जमाते रहते हैं. उनकी बातों में तब दम भी नजर आया जब कुछ माह पहले अपने रसूख के बल पर इन्होने अपना स्थानांतरण आदेश भी रद्द करवा लिया.
एक ओर जहाँ प्रदेश के मुखिया भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हों और खनन माफिया के विरुद्ध पुरे राज्य की मशीनरी सक्रिय है, वहीं रोहतास जिला खनन विभाग के बड़ा बाबू के लूट की दुकान खुलेआम चल रही है. निश्चित्या किसी रसूखदार की सरपरस्ती इसे प्राप्त है, पर सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी भ्रष्टाचार को अपना दुश्मन नम्बर एक मानते हैं तो फिर वो सरपरस्त है कौन?


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