JNU SU : यूनाइटेड लेफ्ट का क्लीन स्वीप, गीता कुमारी बनीं अध्यक्ष

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एक बार फिर लेफ्ट का ही दबदबा रहा और यूनाइटेड लेफ्ट (आईसा, एसएफआई, एसडीएफ) ने बाजी मारते हुए सभी चारों पदों पर जीत हासिल की. बापसा ने सभी सीटों पर तीसरा स्थान पाया. इन चुनावों में कुल 7904 वोटर्स में से 4639 (58.69%) ने वोट डाले थे.
छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरीं लेफ्ट पैनल की गीता कुमारी ने एबीवीपी की निधि त्रिपाठी को 464 वोटों से हरा दिया। गीता को जहां 1506 वोट मिले, वहीं निधि को 1042 वोट मिला. बापसा (बिरसा-अंबेडकर-फूले स्टूडेंट एसोसिएशन) की शबाना अली 935 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं.
वाइस प्रेजिडेंट के चुनाव में लेफ्ट पैनल की सिमोन जोया खान (1876 वोट) ने एबीवीपी के दुर्गेश कुमार (1028 वोट) को शिकस्त दी. जबकि बापसा कैंडिडेट सुबोध कुंवर 910 वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे.
जनरल सेक्रेटरी पद पर भी लेफ्ट के ही दुग्गीराला श्रीकृष्णा ने 2082 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की. दूसरे नंबर पर एबीवीपी के निकुंज मकवाना को 975 तथा बापसा के करम बिद्यानाथ 854 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे.

जॉइंट सेक्रेटरी में 1755 वोटों के साथ लेफ्ट के सुभांशु सिंह पहले नंबर पर और 920 वोटों के साथ एबीवीपी के पंकज केशरी दूसरे नंबर पर तथा 860 वोटों के साथ बापसा कैंडिडेट विनोद कुमार तीसरे स्थान पर रहे.
एबीवीपी ने साइंस स्कूल और स्पेशल सेंटर्स में इस बार भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए चारों सीटों पर सबसे ज्यादा वोट बटोरे. वहीं स्कूल ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर ऐंड कल्चरल स्टडीज में लेफ्ट ने बाजी मारी.
JNU चुनाव में वाम गठबंधन के एकतरफा जीत हासिल करने के बाद ABVP और BAPSA का कहना है कि इस चुनाव में उनका मत प्रतिशत बढ़ा है और वे इसे अपने लिए कामयाबी मानते हैं. ABVP के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक साकेत बहुगुणा ने कहा कि सेंट्रल पैनल के सभी चार पदों के चुनाव में ABVP दूसरे स्थान पर रही. जबकि पिछले साल वह केवल दो पदों पर दूसरे स्थान पर रही थी. साथ ही ABVP अब JNU में सबसे बड़ा एकल छात्र संगठन बन गया है. हम काउंसिलर की दस सीटों के लिए चुनाव जीते जो किसी एक संगठन के लिए सर्वाधिक है.
इस चुनाव में सभी सीटों पर तीसरे स्थान पर रही BAPSA के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार शबाना अली ने कहा कि वह परिणाम को अपने जीत के तौर पर देख रही है क्योंकि उसके मतों में इजाफा हुआ है. हम इससे संतुष्ट हैं कि संगठन को मिले मतों में इजाफा हुआ.

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