यूथ हॉस्टल एसोसिएशन बिहार के अध्यक्ष मोहन कुमार ने कहा कि लोक आस्था के महापर्व छठ और दूसरे त्योहारों के अवसर पर DJ से जितना दूर रहा जाए उतना ही अच्छा, DJ से शोर होता है जबकि दूसरी ओर हमारे पारंपरिक लोक संगीत से मन को शांति मिलती है और चित्त में भक्ति भावना का संचार तीव्र होता है.
यूथ हॉस्टल एसोसिएशन बिहार और सांस्कृतिक संस्था नवगीतिका लोक रसधार द्वारा लोक आस्था के महापर्व छठ से जुड़े पारंपरिक गीतों पर आधारित “जय छठी मैया” का आयोजन यूथ हॉस्टल परिसर में हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन रेल व्हील फैक्टरी की प्रधान वित्त सलाहकार पुष्पा रानी, बिहार प्रशासनिक वाइव्स एसोसिएशन की अध्यक्षा पुष्पलता मोहन, अलका प्रियदर्शिनी, कलाकार मनोज कुमार बच्चन, वरिष्ठ कवि अनिल विभाकर, नीलांशु रंजन, यूथ हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कुमार, संगठन सचिव सुधीर मधुकर, रतन कुमार मिश्रा, सचिव एके बॉस और हॉस्टल प्रबंधक कैप्टन राम कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया.
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने गणेश वंदना ‘मंगल के दाता भगवन बिगड़ी बनाई जी गौरी के ललना हमरा अंगना में आई जी’ के साथ करने के बाद शुद्धता, सच्चाई और समर्पण के महापर्व छठ से जुड़े अनेक लोक गीतों की प्रस्तुति की. “केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झुके, उगिहैं सुरुज देव होते भिनुसरबा अरग के रे बेरिया हो, उ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पे सुगा मंडराय, मार्बो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरझाए, कांचे ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए, पटना के घाट पर हमहुं अरगिया देवई हे छठी मईया, हम ना जाइब दोसर घाट हे छठी मईया, छठ के बरतिया करा दीह, घाट बनवा दीह ओ पिया, हाजीपुर से केलवा मंगा दीह ओ पिया” जैसे गीतों को गाकर माहौल को छठमय बना दिया.
लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने गंगा माता की महिमा का बखान करते हुए भी कई गीत गाए, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया. नीतू कुमारी ने “मांगी ला हम वरदान हे गंगा मईया मांगी ला हम वरदान, मनवा बसेला हे गंगा, तोहरी लहरिया, जियारा में उठेला हिलोर हो माई तोरे जगमग पनिया और चलली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार” जैसे गीत मां गंगा को समर्पित किए. कार्यक्रम में राजन कुमार ने तबला, राकेश कुमार ने हारमोनियम, अजीत कुमार यादव ने झंझरी और विष्णु थापा ने बांसुरी पर संगत किया.
सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ध्रुव कुमार ने छठ की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है. छठ के दौरान प्रयोग में आने वाली प्रायः हर वस्तु जैसे सूप चूल्हा, दउरा प्रकृति के अनुकूल है. प्लास्टिक या इससे बनी चीजों का प्रयोग छठ के दौरान पूर्णतया वर्जित है क्योंकि प्रदूषण विशेषकर जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण प्लास्टिक और उससे बनी वस्तुएं हैं.


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