सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स, NRC) को भविष्य के लिए आधार दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है.
दिल्ली में ‘पोस्ट कॉलोनियल असम’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) चीजों को उचित परिप्रेक्ष्य में रखने का एक अवसर है. यह कोई एक समय का दस्तावेज या केवल 19- 40 लाख लोगों की बात नहीं है. यह भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है.
साथ ही उन्होंने कहा कि इसे लेकर की गई मीडिया संस्थानों की कुछ गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से स्थिति और खराब हो गई. अवैध प्रवासियों की संख्या का पता लगाने की तत्काल आवश्यकता थी, जो कि NRC लागू करने के मौजूदा प्रयास का हिस्सा था. इसमें कुछ भी कम या ज्यादा नहीं होना था.
जस्टिस गोगोई ने NRC पर अपना रुख तब जाहिर किया है, जबकि पन्द्रह दिनों बाद 17 नवंबर को वे रिटायर हो रहे हैं. इस प्रकार चीफ जस्टिस के पद पर रहते हुए उनका यह बयान इस पुरे मामले में बेहद प्रमाणिक माना जायेगा.
हाँलाकि उनके रिटायर होने के समय सुप्रीम कोर्ट में उनके नेतृत्व वाले पीठों के समक्ष कई ऐसे विषय विचाराधीन हैं, जिनका फैसला नये इतिहास को जन्म देगा. इसमें सबसे अहम मामला है अयोध्या का जिसकी सुनवायी 16 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है. केरल के सुविख्यात सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश तथा राफेल डील से जुड़े मामले पर भी पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.


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