चंद्रयान-2 दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लाँच हुआ. चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई की रात 2.51 बजे होनी थी, जिसे करीब 56 मिनट पहले तकनीकी खराबी के कारण टाल दी गई थी और इसरो ने एक हफ्ते के अंदर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर इसे 22 जुलाई को लाँच कर दिया.
तब लॉन्चिंग से ठीक पहले लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम की कुछ खामी सामने आ गयी थी.
इसे पहले 5 चक्कर लगाने थे पर अब 4 चक्कर ही लगाएगा. इसकी लैंडिंग ऐसी जगह तय है, जहां सूरज की रोशनी ज्यादा रहेगी. रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरू होगी.
चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च हुआ. 3,877 किलो वाले इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं. इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारेगा. यह 1380 किलो वाले चंद्रयान-1 से करीब तीन गुना वजनी है.
इसरो चंद्रयान-2 को पहले अक्टूबर 2018 में लॉन्च करने वाला था, 3 जनवरी, 31 जनवरी और 15 जुलाई के बाद आज लाँच हुआ. चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 का ही नया संस्करण है. चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था. चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) भी शामिल हैं. इसके जरिए भारत पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर लैंडर उतारेगा. साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाला पहला देश बन जाएगा.
चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा, इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना रहेगा. ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, जिससे कि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लग सके. लैंडर और रोवर चांद पर पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करेंगे. लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं, जबकि रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा.


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