IMF से पाकिस्तान को कर्ज मिलना मुश्किल; बताना होगा चीन से कितना कर्ज लिया : लेगार्ड

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आर्थिक दिवालियेपन के कगार पर खड़े पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय मदद पाना काफी कठिन लग रहा है. IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने 11 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि आर्थिक मदद पाने के लिए पाकिस्तान को अपने पुराने कर्ज के बारे में पूरी तरह पारदर्शी होना ही होगा.
इंडोनेशिया के बाली द्वीप में IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठक में लेगार्ड ने कहा कि हमें एक खास देश से लिए गए कर्ज की प्रकृति, आकार व शर्तो को पूरी तरह समझने और उसमें पूर्ण पारदर्शिता की जरूरत है. लेगार्ड के इस बयान से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान को हाल के वर्षों में चीन से मिले सभी कर्ज को पूरी तरह उजागर करने के लिए विवश किया जायेगा. पाकिस्तान पर चीन का भारी कर्ज है. उसे ज्यादातर कर्ज चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत मिला है. इसी परियोजना के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का निर्माण किया जा रहा है.


पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कहा था कि कुछ दिन पूर्व ही कहा था कि IMF से बेलआउट पैकेज की मांग की जाएगी. इस बारे में फैसला प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय बैठक में किया गया है. बताया जाता है कि पाकिस्तान आर्थिक पैकेज के तौर पर IMF से आठ अरब डॉलर (करीब 59 हजार करोड़ रुपये) की मांग करने वाला है और यह मदद देने के लिए IMF पाकिस्तान के समक्ष कड़ी शर्त रखेगा. उधर विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान को आयात और कर्ज के भुगतान के लिए बारह अरब डॉलर (करीब 89 हजार करोड़ रुपये) की सख्त जरूरत है.
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने जुलाई के आखिर में पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज मुहैया कराए जाने की संभावनाओं पर IMF को आगाह करते हुए कहा था कि चीन का कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान की नई सरकार को बेलआउट पैकेज नहीं दिया जाए.

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