हिंदी अधिकांश भारत वासियों द्वारा बोली जाती है, जिसे सरकारी अधिकारी और कर्मचारी आसानी से सीख सकते हैं. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी हिंदी को ही राष्ट्रभाषा माना था, क्योंकि यह ऐसी भाषा है जो पूरे देश की धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक संपर्क माध्यम के रूप में प्रयोग की जा सकती है.
पूर्व मध्य रेल के राजभाषा विभाग ने दावा अनुभाग में कार्य करने वाले कर्मचारियों को अपना अधिक से अधिक काम हिंदी में करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वाणिज्य प्रबंधक दयानंद ने इसीके साथ कहा कि हिंदी प्रशासन की भाषा है इसलिए अधिक से अधिक प्रशासनिक कार्य हिंदी में ही संपन्न किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि दूसरी भाषा के जानकार भी इसे आसानी से सीख सकते हैं और इससे राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है. भारतीय भाषाओं में सिर्फ हिंदी में ही ऐसा गुण है. हमारे संविधान में भी संघ सरकार की राजभाषा के रूप में 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया जिसकी लिपि देवनागरी है.
मुख्य वक्ता के रूप में कार्यशाला में उपस्थित मिथिला विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी स्वतंत्र देश में जो सम्मान राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान को मिलता है, वही सम्मान राजभाषा को भी प्राप्त है. 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद संविधान सभा ने आपसी सहमति से हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया. हिंदी में ही भारत के नूतन विचारों का स्पंदन और आत्मा की अभिव्यक्ति होती है. भारत सरकार द्वारा प्रशासनिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और विधि शब्दावली के निर्माण तथा सभी विभागों के अनुकूल साहित्य के निर्माण के लिए भी लगातार प्रयास किया जाता रहा है. अब सभी कंप्यूटरों में भी देवनागरी लिपि में टाइप की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है और यूनिकोड मंगल फोंट में सबको कार्य करने का निर्देश दिया गया है.
इस अवसर पूर्व मध्य रेल के उप मुख्य राजभाषा अधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अनुसार संकल्प, सामान्य आदेश, नियम आदि, सूचनाएं, प्रशासनिक तथा अन्य रिपोर्ट, प्रेस विज्ञप्ति, संसद के किसी सदन या दोनों सदनों में रखी जाने वाली प्रशासनिक और अन्य रिपोर्ट, सरकारी कागज पत्र, करार, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा पत्र, टेंडर, नोटिस और फॉर्म को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है.
कुमार ने कहा कि उच्च न्यायालयों में भी अब हिंदी को कामकाज की भाषा के रूप में स्वीकार कर लिया गया है. पूर्व मध्य रेल राजभाषा नीति के अनुसार क क्षेत्र में आता है जहां राज्यों तथा दूसरे कार्यालयों को भेजे जाने वाले पत्र हिंदी में ही होने चाहिए. इसलिए रेलवे बोर्ड को भेजे जाने वाले तथा क क्षेत्र के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली आदि को भेजे जाने वाले सारे पत्र हिंदी में लिखा जाना चाहिए.
इस अवसर पर राजकिशोर राजन ने कहा कि पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर पूर्णतया हिंदी भाषी क्षेत्र अर्थात क क्षेत्र में वर्गीकृत है. यहां हर विभाग में दैनिक सरकारी कार्य अधिक से अधिक हिंदी में ही संपादित किया जा रहा है. संविधान के अनुच्छेद 351 में परिकल्पना की गई है कि संघ हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देगा जिससे इस भाषा का विकास होने के साथ-साथ भारत की सामासिक संस्कृति का विकास हो.
वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी अशोक कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक डीके भारती, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक सुबोध कुमार, सहायक वाणिज्य प्रबंधक ए के चौधरी सहित अनेक कर्मचारियों ने भाग लिया.

इसके एक दिन पहले ECR के वरिष्ठ अधिकारी विष्णु कुमार (यातायात) की सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक ने कहा कि बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पण और सहयोग की आवश्यकता होती है. टीमवर्क सही हो तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है, असंभव सा दिखने वाला लक्ष्य भी बेहतर रणनीति और टीमवर्क के बल पर हासिल किया जा सकता है. कर्मचारियों के उच्च नैतिक बल से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली भी बेहतर बनती है.
इस अवसर पर विष्णु कुमार की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए मुख्य संरक्षा अधिकारी संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि उनकी कार्यशैली हमेशा ही पारदर्शी और नियमानुकूल रही है. कैरियर के प्रारंभ से ही समय से कार्यालय आना और सभी कामों को नियत समय पर निपटाना विष्णु कुमार की आदत रही.
मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (यात्री सेवा और कैटरिंग) अमिताभ प्रभाकर ने कहा कि आपने न सिर्फ स्वयं बढ़िया काम किया बल्कि रेल सेवा में आने वाले जूनियर अधिकारियों को भी हमेशा अच्छी ट्रेनिंग दी. मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (माल भाड़ा) दयानंद ने कहा कि विष्णु कुमार कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ मितभाषी और मृदुभाषी व्यक्तित्व के स्वामी हैं और हर उलझे मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने में विश्वास करने वाले अधिकारी रहे हैं. विष्णु कुमार हमेशा पठन-पाठन में विश्वास करते रहे और उनके द्वारा लिखित कई शोध- आलेख अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए हैं.
कार्यक्रम में उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक जफर आजम और पी के सिन्हा ने भी अपने विचार रखे. मुख्य वाणिज्य निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने विष्णु कुमार के व्यक्तित्व पर स्वरचित कविता का पाठ किया. शशिभूषण शर्मा ने विष्णु कुमार को कर्मचारियों का हितैषी और सच्चा मार्गदर्शक बताया. कार्यक्रम में सभी मंडलों के कई अधिकारी और वाणिज्य विभाग के कर्मचारीगण उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (यात्री सेवा) दिलीप कुमार ने किया.


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