प्रगति मैदान दिल्ली में चल रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में बिहार की मिथिला पेंटिंग, टिकुली आर्ट, सुजनी कला के साथ ही बिहारी लोकगीतों की धूम मची है.
मेले में आयोजित बिहार दिवस का उद्घाटन प्रदेश के उद्योग मंत्री श्याम रजक, उद्योग विभाग के सचिव नर्मदेश्वर लाल और उपेंद्र महारथी संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया. रजक ने इस अवसर पर कहा कि पारंपरिक कला, हथकरघा और खादी में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. बिहार सरकार मिथिला पेंटिंग, टिकुली कला, मंजूषा कला, भागलपुरी सिल्क, सिक्की शिल्प आदि को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रही है. पटना में आधुनिक डिजाइन के खादी वस्त्रों की बिक्री के लिए भारत का सबसे बड़ा खादी मॉल भी खोला गया है.
बिहारी कलाकारों के लोक गीत से अंतरराष्ट्रीय मेला परिसर झूम उठा. हंसध्वनि थियेटर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में डा नीतू कुमारी नवगीत, सत्येंद्र कुमार संगीत, अमर आनंद तथा उषा कुमारी ने बिहार की संस्कृति से जुड़े पारंपरिक लोक गीतों की प्रस्तुति कर श्रोताओं को झुमने पर विवश कर दिया. नीतू कुमारी नवगीत ने गंगा मैया की स्तुति करते हुए मांगी ला हम वरदान है गंगा मैया मांगी ला हम वरदान, कौने रंग वृंदावनवां, कौने रंगे यमुना, कौन है रंगे बृजबाला कन्हैया खेलत हो अंगना, राजा जनक जी के बाग में अलबेला रघुवर आयो जी, पटना से बैदा बुलाई द नजरा गईली गुईंया, राम जी से पूछे जनकपुर के नारी बता द बबुआ लोगवा देत काहे गारी बता द बबुआ जैसे पारंपरिक लोक गीतों को प्रस्तुत किया.
नीतू कुमारी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से ओतप्रोत गीत “जिस धरा पर हमने जन्म लिया वही हमारा महान है ए बिहार की धरती पर जीवन कुर्बान है हर दिल में बसता प्यार यहां पर गंगा प्यार की बहती है देव अतिथि कहलाते हैं” गीत पेश किया जिसे सर्वाधिक सराहना मिली.
भोजपुरी रॉकस्टार सत्येंद्र कुमार संगीत ने बाल्मीकि ने रची रामायण लव कुश को जाने संसार यह है मेरा बिहार, बिदेसीया गीत चर्हती जवनिया बैरन भईले हमरो से के मोरा हरिहे कलेस रे बिदेसीया, अंगुरी मे दसले बिया नगीनिया रे ए ननदी दियरा जरा द जैसे गीत पेश किए. दर्शको की माँग पर उन्होंने गोरिया चांद के अंजोरिया नियन गोर बारू हो तोहार जोड़ केहू नइखे तू बेजोड़ बारू हो, तलवा तलैया हिलोर मारे नया लहरे फसलिया ठावे ठाव गीत भी पेश किया. कार्यक्रम के दौरान हरि भूषण झा ने तबला पर शशि भूषण झा ने ऑर्गन पर, कुमार पारस ने बैंजो पर, पंकज बिष्ट ने पैड पर और प्रीतम बग्गा ने ढोलक पर दोनों के साथ संगत किया. इनके साथ ही लोकप्रिय गायक अमर आनंद और उषा कुमारी ने भी कई बिहारी पारंपरिक गीतों को पेश कर श्रोताओं को झुमाया.


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