देश में आजादी के बाद सबसे बड़ी कर सुधार व्यवस्था वस्तु एवं सेवा कर (GST) 30 जून को आधी रात से लागू हो जाएगा. CII ने कहा कि भारतीय कंपनियां GST के लिए तैयार हैं. कैट ने 31 मार्च 18 तक की अवधि को अंतरिम काल घोषित करने की मांग की है.
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि GST काउंसिल ने इसको एक जुलाई से लागू करने का फैसला लिया है. हमारे पास इतना समय नहीं है कि हम GST को टालें. GST आधिकारिक तौर पर 30 जून को मध्यरात को लांच हो जाएगा और दिल्ली में एक जुलाई से काम करने लगेगा. GST काउंसिल ने कारोबारियों को रिटर्न भरने के लिए दो महीने का समय दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि आईटी तैयारी पर विस्तार से चर्चा की गई है और 65.6 लाख इकाइयों ने अस्थायी पंजीकरण करा लिया है.
वित्तमंत्री ने बताया कि 7,500 रुपये या इससे ज्यादा महंगे होटल कमरों पर 28 फीसदी और 2,500 से 7,500 रुपये तक के होटल कमरों पर 18 फीसदी टैक्स लगेगा. उन्होंने कहा कि ऐसे होटलों पर एयर कंडीशंड रेस्टोरेंट की तरह 18 फीसदी टैक्स लगेगा. वित्तमंत्री ने कहा कि ई-वे विधेयक पर आगे विचार-विमर्श किया जाएगा, तब तक वैकल्पिक नियम काम करेगा. काउंसिल ने आज मुनाफाखोरी निरोधक और ई-वे विधेयक विधेयक नियमावली को मंजूरी दे दी.

जेटली ने कहा कि GST के तहत राज्य सरकार की ओर से संचालित लॉटरी पर 12 फीसदी और सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त प्राइवेट लॉटरी पर 28 फीसदी का टैक्स लगेगा. उन्होंने बताया कि GST में लॉटरी पर टैक्स अहम मुद्दा था. कुछ राज्य इसमें कम टैक्स लगाने के पक्ष में हैं. अब GST काउंसिल की बैठक 30 जून को होगी.
माना जा रहा है कि GST प्रणाली लागू होने के बाद पहले छह महीनों तक किसी गलती पर होने वाली कार्रवाई को लेकर सरकार का रुख नरम रह सकता है. हालांकि व्यापारियों का कहना है कि सरकार को कम से कम एक साल तक GST संबंधी गलती होने पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. GST के तहत कुछ गलतियों पर जुर्माने तो कुछ पर कैद तक का प्रावधान रखा गया है।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से कहा है कि 31 मार्च, 2018 तक की अवधि को अंतरिम काल घोषित किया जाए और कर पालन में हुई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए व्यापारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए.
कैट ने GST काउंसिल से आग्रह किया है कि फैब्रिक अभी तक कर मुक्त था, इसलिए फैब्रिक के व्यापारियों को कर प्रणाली की कोई जानकारी नहीं है. ऐसे में फैब्रिक के कारोबारियों को एक साल का समय दिया जाए ताकि वे कर प्रणाली को समझ सकें और GST प्रणाली के नियमों का सही पालन कर सकें.

कैट ने सरकार से यह भी मांग की है कि प्रयोग की गई खाली बोतलों जैसे स्क्रैप व रिसाइकिल वस्तुओं को 12 फीसदी, वॉशिंग सोप (साबुन), लांड्री सोप और टॉयलेट सोप को 18 फीसदी स्लैब में से निकाल कर कम दर में डाला जाए. साथ ही ई-वे बिल एवं HSN कोड को फिलहाल 6 महीनों के लिए स्थगित रखा जाए, क्योंकि बड़ी मात्रा में व्यापारी इससे अनभिज्ञ हैं और इस प्रक्रिया को समझने एवं उसका पालन करने के लिए उनको थोड़ा समय दिया जाना अच्छा होगा. सूत्रों के मुताबिक व्यापारियों की मांग के संदर्भ में सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
उद्योग संगठन CII ने कहा है कि भारतीय कंपनियां 1 जुलाई से जीएसटी के क्रियान्वयन के लिए तैयार हैं. इसका कारण है कि नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निर्यात विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी. GST को सहयोगात्मक और मंत्रणात्मक प्रयासों के बाद अंतिम रूप मिला है और हम इसके लागू होने के लिए तैयार हैं.
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि उद्यमों को नए नियमों के अनुपालन में सक्षम बनाने के लिए CII देशभर में 100 से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है. इन कार्यशालाओं के लगभग 5,000 उद्यमों तक पहुंचने की उम्मीद है. इसके अलावा एक हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है, जहां कार्यशालाओं में भाग लेने वाले लोग स्पष्टीकरण का अनुरोध कर सकते हैं. साथ ही GST से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में उद्योग को सूचित करने के लिए एक जागरूकता अभियान भी लांच किया गया है.

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