प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद कहा कि मैं भारत के 130 करोड़ नागरिकों का सिर झुका कर नमन करता हूँ जिन्होंने इस फ़कीर की झोली को भर दिया. आज के आंकड़े विश्व के लोकतांत्रिक इतिहास की एक सबसे बड़ी घटना है.
भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मैं बदइरादे या बदनियत से कोई काम नहीं करूंगा. आज कोई विजयी हुआ है तो हिन्दुस्तान, लोकतंत्र और जनता- जनार्दन विजयी हुई है. चुनाव की शुरुआत होने के पहले दिन से मैं कहा रहा था कि ये चुनाव कोई दल, उम्मीदवार या कोई नेता नहीं बल्कि देश की जनता लड़ रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा देश के संविधान एवं संघवाद के प्रति समर्पित है तथा केंद्र एवं राज्य देश की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे. सरकार भले ही बहुमत से चलती हो, लेकिन देश सर्वमत से चलता है और हम घोर विरोधियों को भी देशहित में साथ लेकर चलेंगे.
मोदी ने कहा कि दो से दोबारा आने तक की इस यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव आए पर हम न कभी रुके,न झुके और न ही थके. जब दो थे तब भी निराश नहीं हुए और आज जब दोबारा आए हैं तब भी अपनी नम्रता, आदर्श, विवेक और संस्कारों को नहीं छोड़ेंगे. को नहीं छोड़ेंगे. इन्हीं शब्दों के साथ इस चुनाव में विजयी तमाम विजयी सांसदों को बधाई देते हुए लोकतंत्र की खातिर जिन लोगों ने बलिदान दिया या घायल हुए हैं, उनके पारिजनों के प्रति संवेदना प्रकट किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनाव में कोई भी दल महंगाई को मुद्दा नहीं बना पाया, किसी भी दल ने हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उसे मुद्दा नहीं बना पाया. यह पहला चुनाव था जिसमें एक भी राजनीतिक दल धर्मनिरपेक्षता का नकाब पहनकर देश को गुमराह नहीं कर पाया. मोदी ने कहा कि मुझे अपने लिये कुछ नहीं चाहिए, मेरे समय का पल पल और शरीर का कण कण देशवासियों के लिये समर्पित है. 21वीं सदी के भारत में अब सिर्फ दो जातियों रहने वाली हैं, एक गरीब और दूसरी देश को गरीबी से मुक्त कराने के लिए कुछ न कुछ योगदान देने वालों की.
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ईमानदारी के लिए तड़पते नागरिकों की आशा-आकांक्षा की विजय है. आज की विजय देश के उन किसानों की है, जो पसीना बहाकर और स्वयं परेशान रहते हुए राष्ट्र का पेट भरते हैं और उन 40 करोड़ असंगठित मजदूरों की है, जिन्हें पेंशन योजना से सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला. यह विजय उस बीमार व्यक्ति की है जो पैसों की कमी के वजह से अपना उपचार नहीं करवा पा रहा था और यह विजय उन बेघरों की है जो जीवन भर कच्चे मकान में रहे और आज अपने पक्के घर में रह रहे हैं. यह उन सबके आशीर्वाद की विजय है.


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