काशी विश्वनाथ एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अपना दावा छोड़ मुस्लिम समाज बड़े हृदय का परिचय दे : संत समिति

 99 


अखिल भारतीय संत समिति ने मुस्लिम समाज से आग्रह किया कि काशी विश्वनाथ वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा पर अपना दावा छोड़कर बड़े हृदय का परिचय दें, क्योंकि श्रीराम जन्मभूमि की तरह यहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से खुदायी की कोई आवश्यकता नहीं है.
गुजरात के सरसापुरी में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सम्पन्न बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किये गये तथा आगामी 5 वर्षों के लिए नयी कार्यकारिणी का निर्वाचन किया. संत समिति ने राम जन्मभूमि न्यास को 40 किलोग्राम पीतल और 51 किलोग्राम चांदी की ईंटें देने का भी फैसला किया.
अखिल भारतीय संत समिति ने आचार्य स्वामी अविचल दास जी गुजरात को समिति का राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्वामी जितेन्द्रानन्दसरस्वती उत्तर प्रदेश को महामंत्री, स्वामी जनार्दनहरी गुजरात को कोषाध्यक्ष एवं महर्षि आंजनेश जी बिहार को संगठन मंत्री चुना. इनके साथ ही 5 संरक्षक, निदेशक मंडल में नौ, 5 उपाध्यक्ष, दो संयुक्त महामंत्री, दो सह- संगठन मंत्री, 6 मंत्री और हरिद्वार के बलरामदासजी हठयोगी को संस्था का प्रवक्ता चूना.
महामंडलेश्वर जनार्दन हरि द्वारा रखे गये एक प्रस्ताव में श्रीराम जन्मभूमि के लिए चल रहे 491 वर्षों के संघर्ष के बाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सत्य को उद्घोषित करते हुए न्याय देने के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की गयी. समिति ने अपने संस्थापक पूज्य वामदेव जी महाराज द्वारा निर्धारित उद्देश्य धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा, गौ एवं गंगा रक्षा के प्रति अपना संकल्प व्यक्त करते हुए प्रस्ताव पारित कर मुस्लिम समाज से आग्रह किया कि काशी विश्वनाथ वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा पर अपना दावा छोड़कर बड़े हृदय का परिचय दें. ज्ञात है कि श्री काशी विश्वनाथ के वाद की सुनवाई 9 जनवरी से वाराणसी न्यायालय में होनी है.
महामंडलेश्वर दिव्यानंद सरस्वती ने धारा 370 समाप्त करने, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 एवं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर बनाने संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय और संकल्प के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहने एवं राष्ट्रीय एकता- अखंडता के हित में भारत सरकार के प्रत्येक निर्णय का समर्थन करने का प्रस्ताव रखा. सर्व सम्मत से पारित इस प्रस्ताव के अंत में कहा गया कि पूरा देश निर्णय के साथ है, सडकों पर उतरे कुछ स्वार्थी और राष्ट्रद्रोही तत्व की पहचान करते हुए कानून को लागु करने में जरा भी ढीलायी न की जाए.
निर्वाणी अखाडा अयोध्या के सचिव महंत गौरीशंकरदास ने श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने से जुड़े एक प्रस्ताव में भव्य राम मंदिर बनाने के लिए संघर्ष में जीवन समर्पित कर चुके तमाम साधु- संतों एवं श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संत समिति RSS एवं विश्व हिंदू परिषद के साथ रही है. 1989 में शिलान्यास के वक्त देश के पौने तीन लाख गाँव से 6.60 करोड़ लोगों ने रामशिला का पूजन कर सवा- सवा रूपये कर कुल 8.25 करोड़ रूपये दिए थे. जिससे पिछले 30 वर्षों से अनवरत शिलाओं को तराशने का कार्य हो रहा है. संत समिति चाहती है कि मंदिर में इन शिलाओं का उपयोग हो.


loading…

Loading…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *