अब तक आपने बारूद से बने पटाखों या फिर ग्रीन पटाखों के बारे में ही सुना होगा. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पटाखों को लेकर चौंकाने वाली खोज कर ली है. वैज्ञानिकों का दावा है कि अब गोमूत्र से बने पटाखे बाजार में मिलेंगे. यह पटाखे ग्रीन पटाखों के मुकाबले 50 प्रतिशत सस्ते होंगे, साथ ही यह बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं करेंगे. इनको चलाने पर खुशबू आएगी. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के वैज्ञानिकों ने मोहाली में ऐसे पटाखों का निर्माण कर लिया है. आईआईएसईआर के वैज्ञानिकों की इसी टीम ने पिछले साल ग्रीन पटाखों का निर्माण किया था जो धुंआ नहीं फैलाते थे साथ ही उनके चलने पर खुशबू आती थी. लेकिन ये पटाखे प्लास्टिक की बोतलों में थे. संस्‍थान के रसायन वैज्ञानिक प्रोफेसर समरथ घोष के अनुसार गोमूत्र से बने पटाखे भी ग्रीन पटाखों की श्रेणी में ही होंगे, लेकिन यह 50 प्रतिशत सस्ते होंगे. अब संस्‍थान इनका निर्माण बड़े स्तर पर करने के बारे में विचार कर रहा है.
घोष ने बताया नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनईईआईआई) के वैज्ञानिकों ने भी ग्रीन पटाखों का निर्माण किया था जिनको अप्रैल के अंत तक सरकार से मान्यता मिलने की उम्मीद है. उनके ग्रीन पटाखे 25 से 30 प्रतिशत ही प्रदूषण में कमी करते हैं, लेकिन गोमूत्र से बने पटाखों से नाममात्र का भी प्रदूषण नहीं होगा. उन्होंने कहा कि दीवाली में अभी छह माह से ज्यादा का समय है. ऐसे में हमारे पास इतना समय है कि जल्द से जल्द हम इनका ज्यादा से ज्‍यादा प्रोडक्‍शन कर सकें.


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