श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक 19 फरवरी को

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र की ओर से गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक 19 फरवरी को होगी. ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के अनुसार सबसे अच्छी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए भव्य राम मंदिर चार से पांच वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा.
कामेश्वर चौपाल ने ही 1989 में राम मंदिर की नींव के लिए पहली ईंट रखी थी, उन्हें प्रथम कारसेवक माना जाता है. 15 लोगों के ट्रस्ट में शामिल चौपाल दो बार बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं. वो श्रीराम लोक संघर्ष समिति के बिहार प्रदेश संजोयक और बाद में भाजपा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं.
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ट्रस्ट के गठन का एलान किया। ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के नाम से गठित इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट में एक ट्रस्टी अनिवार्य रूप से दलित होगा। ट्रस्ट के डीड में ही इसके नौ सदस्यों के नाम दे दिए गए हैं, जिनमें रामलला को सुप्रीम कोर्ट में जीत दिलाने वाले रामभक्त के. परासरन का नाम सबसे ऊपर है। इसके साथ ही 1989 में राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले दलित कामेश्वर चौपाल का भी नाम इसमें शामिल है।
ट्रस्ट के स्थायी नौ सदस्यों में पहला नाम है सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. परासरन जो ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे. पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित 92 वर्षीय परासन ने रामलला विराजमान की ओर से अयोध्या मामले में लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर बहस की थी जबकि उन्हें कुर्सी पर बैठने की अनुमति दी गई थी. वो रामसेतु समुद्रम परियोजना और सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के वकील के रूप में भी मुकदमा लड़ चुके हैं. उन्हें संविधान के साथ ही भारतीय इतिहास, वेद, पुराण और धर्म का व्यापक ज्ञान है.
दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कामेश्वर चौपाल ने ही 1989 में राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी. पुरे संत एवं विद्वत समाज ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया था. 1991 में वो रामविलास पासवान के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं.
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज, ज्योतिष पीठाधीश्वर बद्रीनाथ. इन्हें ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर विवाद भी हुआ था, मामला हाईकोर्ट में भी गया था.
जगतगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज, पीठाधीश्वर, पेजावर मठ, उडुपी, कर्नाटक. दिसंबर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के निधन के बाद इन्होंने 33वें पीठाधीश्वर की पदवी संभाली है.
युगपुरुष परमानंद जी महाराज, प्रमुख, अखंड आश्रम, हरिद्वार. इनकी वेदांत पर 150 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. संयुक्त राष्ट्र में इन्होंने वर्ष 2000 में आध्यात्मिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को संबोधित किया था.
स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज, पुणे. महाराष्ट्र के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य 70 वर्षीय गिरि जी महाराज रामायण, श्रीमद् भागवत गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का लगातार देश- विदेश में प्रवचन करते हैं.
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र अयोध्या राजपरिवार के वंशज हैं. रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य और प्रख्यात समाजसेवी मिश्र ने 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था.
डॉ. अनिल मिश्र, अयोध्या के होम्योपैथिक चिकित्सक. उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार पद पर कार्यरत मिश्र, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के कार्यवाह भी हैं.
महंत दिनेंद्र दास, अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि. राम मंदिर- बाबरी मस्जिद विवाद में एक पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत हैं.
अखिल भारतीय संत समिति ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के गठन का स्वागत किया. समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रनंद सरस्वती एवं संगठन मंत्री ब्रह्मऋषि आन्ज्नेश जी महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के निर्माण के साथ ही राम मंदिर निर्माण की सारी बाधायें अब दूर हो गई हैं. हमें विश्वास है कि मंदिर निर्माण के लिए जिस प्रस्तावित नक्शे को हृदय से लगा कर देशवासियों ने कारसेवा की, करोड़ों लोगों ने सवा-सवा रुपये दीये और करोड़ों गाँवों से एक-एक ईंट अयोध्या भेजी गई, उसी नक्शे के आधार पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में जल्द से जल्द बनकर तैयार होगा.
दोनों संतों ने ट्रस्ट में दलित बिरादरी के व्यक्ति को स्थाई सदस्य के रूप में शामिल करने की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि दलित समाज को न्यास में स्थायी प्रतिनिधित्व देना अत्यंत सराहनीय क़दम है. ईश्वर के दरबार में कोई भेदभाव नहीं होता, इस घोषणा से सम्पूर्ण हिन्दू समाज के मध्य सौहार्द और प्रगाढ़ होगा.
गृहमंत्रालय के अवर सचिव खेला राम मुर्मू द्वारा 100 रुपये के स्टांप पेपर पर पंजीकृत ट्रस्ट के डीड में ही स्पष्ट कर दिया गया है कि ट्रस्ट के गठन के बाद सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी. ट्रस्ट पूरी तरह सरकारी दखल से मुक्त होगा. ट्रस्ट का वर्तमान पता ग्रेटर कैलाश पार्ट-एक है, जिसे बाद में ट्रस्ट किसी भी दूसरी जगह स्थानांतरित कर सकता है. ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण और उसके रखरखाव के लिए धन जुटाने तथा प्रबंधन की पूरी छूट प्राप्त है. ट्रस्ट के सभी सदस्यों का हिंदू धर्मावलंबी होना अनिवार्य बनाया गया है. यह शर्त उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों और अयोध्या के जिलाधिकारी के पदेन सदस्य होने पर भी लागू रहेगा. अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के हिंदू धर्मावलंबी नहीं होने की स्थिति में वहां के एडिशनल मजिस्ट्रेट को ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा.
ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के मौजूदा 9 सदस्यों को दिया गया है, जो बहुमत के आधार पर इनका चयन करेंगे. इन दोनों सदस्यों के चुनाव में सरकार की ओर से मनोनीत अधिकारी भाग नहीं लेंगे.
ट्रस्ट ही राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, उसकी रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आने-जाने, ठहरने और खाने-पीने के इंतजाम की जिम्मेदारी संभालेगी. अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन चलाने वाली विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट बना रखा रखा है. जिसने उसका नक्शा बनाने के साथ ही उसके अनुरूप पत्थरों की तराशने का लगभग 70% काम भी पूरा कर लिया है, लेकिन नए ट्रस्ट को भव्य राम मंदिर के निर्माण के नक्शे के चयन और निर्माण सामग्री का उपयोग करने की छूट है.


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