शास्त्रों के अनुसार रावण का वध कर भगवान राम अयोध्या लोटे थे औरतब अयोध्यावासियों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया था, तब से हर वर्ष इस दिन को दिपावाली के रूप में मनाया जाता है. दिवाली पर्व अंधेरे पर प्रकाश की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन गणेश जी और माता लक्ष्मी कुबेर की पूजा की जाती है.
कुछ स्थानों यथा पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम में दीवाली के दिन माँ काली की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जब असुरों का वध करने पर भी मां काली का गुस्सा शांत नहीं हुआ तब भगवान शिव मां काली के पैरों के नीचे लेट गए थे. इसलिए दीवाली के दिन माँ काली के इस रौद्र रूप की भी पूजा की जाती है.
दीवाली कार्तिक माह के अमावस्या की रात को पड़ती है. इस वर्ष 27 अक्टूबर रविवार को पड़ने वाले दिवाली पर प्रदोश काल शाम 6 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक है. यह अपने ईष्ट की आराधना करने की भी रात है. दीवाली की रात मंत्र सिद्धि के लिए भी विशेष मानी जाती है, इसलिए यह रात्रि तांत्रिकों के लिए भी विशिष्ट होती है.
दिवाली का दिन मां लक्ष्मी के आगमन का दिन माना जाता है. सभी लोग दिवाली के दिन अपने घर की साफ- सफाई करते हैं, घर को सजाते हैं. दिवाली के दिन घर में रंगोली बनाये जाते हैं. लोग अपने घर और दफ्तरों को दीपक जलाकर सजाते हैं. गणेश- लक्ष्मीजी के साथ ही पैसों, गहनों और बहीखातों की पूजा की जाती है. एक-दूसरे को प्रसाद बांटे जाते हैं. पटाखे जलाते हैं.
धन प्राप्ती के लिए दीपावली पर साधारण, ज्योतिषीय और तां‍त्रिक तीनों उपाय किए जाते हैं, कुछ सामान्य उपाय:-
1.मछलियों को आंटे की गोलियां खिलायें
2.शिव मंदिर में शिव लिंग पर चावल चढ़ायें.
3.दीवाली की रात उल्लू की तस्वीर तिजोरी पर लगाएं.
4.तुलसी के पौधे पर लाल या पीले रंग का वस्त्र चढ़ाएं और एक घी का दीप जलायें.
5.दीवाली की रात महालक्ष्मी मंदिर में पांच कमल के फूल अर्पित कर पांच दीपक जलाएं.
6.प्रत्‍येक अमावस्‍या को शाम में किसी दिव्‍यांग व्‍यक्ति या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं.
7.दिवाली को साबुत उड़द, दही और सिंदूर लेकर पीपल की जड़ में रखें और एक दीपक जलाएं.
8.प्रात:काल मंदिर में लक्ष्‍मीजी को पोशाक चढाएं, खुशबूदार गुलाब की अगरबत्‍ती जलाकर ध्‍यान करें.
9.पूजन के बाद काला तिल हाथ में लेकर घर के सभी सदस्य के सिर पर से सात बार घुमाकर फेंक दें.
10.दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजन में पीली कौड़ियां रखें और पूजा के बाद इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी में रख लें.
11.दीवाली की रात अपनी पत्नी को लाल वस्त्र का उपहार दें, ध्यान रखें कि आपकी पत्नी को इस बारे में पहले से पता न हो.
12.रात्रि में लक्ष्‍मी पूजन के साथ गन्‍ने की भी पूजा करें, उस गन्‍ने को खाएं नहीं बल्कि स्‍वच्‍छ जल की धारा में प्रवाहित कर दें.
13.दीवाली की रात को साबु‍त फिटकिरी का एक टुकड़ा दुकान में चारों तरफ घुमाएं और किसी चौराहे पर जाकर उसे उत्‍तर दिशा की तरफ फेंक दें.
14.दिवाली की रात पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं, लौटते वक्त पीछे मुड़कर ना देखें और ना ही रास्ते में किसी से वार्तालाप के लिए रुकें.
15.दीवाली की रात्रि कपूर जला कर उसमे शुद्ध रोली डाल दें. रोली जल जाने के बाद जो राख बचेगी उसे लाल कपड़े या रुमाल में बाँध कर तिजोरी में रख दें.
16.पूजन के पश्‍चात मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा पर थोडा चने की दाल छिड़कें, दुसरे दिन उन्हें एकत्र कर पीपल के पेड़ पर समर्पित कर दें तो नौकरी पाने में सफलता मिलेगी.
17.लाल चंदन, गुलाब के फूल, काली हल्‍दी, 5 सुपारी, 5 कौड़ी और रोली लाल कपडे़ में बांधकर चांदी की कटोरी में रख पूजन करें और उसे पैसे रखने की जगह में रखलें.
18.माता लक्ष्‍मी को कमलगट्टे की माला पहनाएं और अगले दिन सवेरे लाल कपड़े में इसे बांधकर घर में पैसे रखने वाली जगह पर 3 बार ऊं महालक्ष्‍म्‍यै नम: बोल कर रखें.


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