कांग्रेस पार्टी की न्याय योजना के संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे नोटिस जारी कर कांग्रेस को 10 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा है. एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल गांधी से पूछा कि इस वादे को गरीबों को रिश्वत देने जैसा क्यों न माना जाए? कोर्ट ने यह भी कहा है कि पार्टी के खिलाफ पाबंदी या ऐसी ही दूसरी कोई कार्रवाई क्यों न की जाए?
जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार की डिविजन बेंच ने इस मामले में चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा है. याचिका पर अगली सुनवाई 13 मई को होगी. हाईकोर्ट के वकील मोहित कुमार ने कांग्रेस के घोषणा पत्र में गरीबों को 72 हज़ार रुपये सालाना की आर्थिक मदद देने वाली न्याय योजना मामले में एक जनहित याचिका दाखिल की है.
याचिकाकर्ता ने कहा है कि इस तरह की घोषणा रिश्वतखोरी और वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश के समान है. मतदाता को प्रलोभन देना निष्पक्ष मतदान के खिलाफ है. इससे मतदान की प्रक्रिया प्रभावित होती है. कांग्रेस ने घोषणा पत्र में गरीबों को 72 हजार सालाना देने का वायदा कर मतदाताओं को प्रलोभन दिया है. यह आचार संहिता का उल्लंघन है. याचिका में कांग्रेस के विरुद्ध कार्यवाई करने की मांग की गई है.
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों की आय सुनिश्चित करने के लिए सालाना 72 हज़ार रुपये देने का वादा किया है. इस स्कीम को न्याय योजना का नाम दिया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष सहित पार्टी के तमाम नेता अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसका जमकर प्रचार कर रहे हैं. कांग्रेस का मानना है कि यह स्कीम लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होगी.


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