पटना सहित बिहार के कई इलाकों में पिछले चार दिन से हुई बारिश और बाढ़ से जुड़े हादसों में अब तक 29 मौत हो चुकी है. राजधानी के आधे से अधिक घरों में पानी घुस गया है, कई स्थानों पर अभी भी 6 से 8 फीट जलजमाव है. प्रशासन ने स्कूल-कॉलेज में छुट्टी कर दी. रेस्क्यू ऑपरेशन में वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर जुटे हैं. शुक्रवार रात से अपने घर में फंसे राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और लोक गायिका शारदा सिन्‍हा को राजेंद्र नगर से रेस्क्यू कर प्रशासन ने निकाला. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा है कि यह आपदा प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि 14 वर्षों तक नीतीश सरकार की गलत नीतियों, नियम, जलनिकासी व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने, ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं होने के कारण है.
बिहार के अन्यान्य जिलों सुपौल, अररिया, किशनगंज, बांका, समस्तीपुर, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, दरभंगा, भागलपुर, खगड़िया, कटिहार, वैशाली और मुंगेर की बात क्या करनी, राजधानी पटना में जल कर्फ्यू जैसी स्थिति है. घरों में बिजली और पीने का पानी तक नहीं है. राजधानी में मानसून की 40% बारिश 48 घंटे में हुई है. पटना के निकट की चारों नदियां सोन, गंगा, गंडक और पुनपुन खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुकी हैं. राज्य सरकार ने पटना से पानी निकालने के लिए कोल इंडिया से दो डीवाटरिंग पंप मंगवाया है.
भारी बारिश के कारण जल भराव की वजह से पटना की स्थिति काफी गम्भीर बनी हुई है. बिजली और पेयजल का संकट गहरा गया है. घरों के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरा हुआ है, सड़क व गलियां पानी से लबालब हैं. लोगों का धैर्य साथ छोड़ रहा है. सवाल खड़ा है कि सरकार वर्षों से लगातार करोडों रूपये खर्च करती आ रही है कि पटना में जलजमाव नहीं हो पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ. सम्प हाउस बंद पड़े हैं या उनकी क्षमता काफी कम है. नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही है. करोडो़ं का खर्च सिर्फ काम की औपचारिकता में होता है. पिछले पांच वर्ष में अकेले बोरिंग केनाल रोड में निर्माण और उसे तोड़ने फ़िर नया निर्माण… इसी पर सैकड़ों करोड़ खर्च हो रहे हैं.


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