बेहद गरीबी में घर का कामकाज करते हुए भी भविष्य में कुछ कर गुजरने का सपना मन में संजोये और दृढ इच्छाशक्ति के साथ पूर्ण मनोयोग से पढ़ने वाली बच्चियों को क्राई, दीप, जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र आदि स्वयंसेवी संस्थाओं का भरपूर सहयोग मिलने लगा है. इन संस्थाओं ने विषम परिस्थितिओं में रहने वाली छात्राओं के लिए निःशुल्क कोचिंग केंद्र स्थापित किये हैं, जहाँ से उन्हें अपने सपने को साकार करने में काफी मदद मिली है.
इन्हीं बच्चियों में एक है 16 वर्षीय कविता जो बचपन से डॉक्टर बन लोगो की सेवा करने का सपना देखती रही है. पश्चिम चंपारण जिले के कमरछनिया गाँव के कविता की माँ मीना देवी एक खेतिहर मजदूर है, जबकि उसके पिता श्रीराम जीविकोपार्जन के लिए दिल्‍ली में रहने को मजबूर हैं. माँ के काम पर चले जाने के पश्चात घर की बड़ी बेटी होने के नाते घरेलू काम- काज की सारी जिम्मेवारी कविता के उपर ही होती है. प्रत्येक दिन घरेलु काम से निवृत हो कविता घने जंगल वाले सात किलोमीटर रास्ते को पार कर अपने विद्यालय पहुँचती है. इन विषम परिस्थितियों को भी कविता ने अपने लक्ष्य के आड़े कभी नहीं आने दिया.
कविता कुमारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की वार्षिक परीक्षा 2019 में प्रथम श्रेणी से उतीर्ण होकर अपने घर परिवार और इलाके का नाम रौशन किया है. कविता ने 500 में 369 अंक प्राप्त किये, उसे गणित में 81% अंक मिले हैं. कविता स्वयं जानती है कि अपना सपना पूरा करना उसके लिए आसन नहीं है, इसके लिए उसे और अधिक मेहनत करने की जरुरत है. वो बताती है कि मेरा परिवार काफी गरीब है, हमलोग निजी कोचिंग संस्थान का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं. स्वयंसेवी संस्था ने अगर निःशुल्क कोचिंग केंद्र स्थापित नहीं किये होते तो यह सफलता हासिल करना भी कठिन होता. इनके निःशुल्क कोचिंग केंद्र की मदद और सहयोग से हमने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा लिया है.
दीप तथा क्राई संस्था द्वारा चलाये जा रहे नौरंगिया कोचिंग केंद्र में रेणु कुमार इस कोचिंग केंद्र में कविता सहित 47 छात्राओं को पढ़ाते हैं. कविता की चर्चा होने पर उसके लिए काफी गर्व महसूस करते हुए कहते हैं कि कविता अपने लक्ष्य के प्रति पूर्णतया समर्पित बच्ची है जिसने लगातार अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को बखूबी पार करते हुए यह मुकाम पाया है, हाँलाकि उसकी मंजिल अभी काफी दूर है. उन्होंने बताया कि कविता के अलावे रिंझु कुमारी ने भी काफी गरीबी झेलते और मुसीबतों से जूझते हुए मैट्रिक की परीक्षा में अपना परचम लहराया है.

इसी प्रकार समस्तीपुर जिले के गंगसारा गाँव की रहने वाली 16 वर्षीय मुस्कान कुमारी ने भी दसवीं के बोर्ड परीक्षा में 500 में 312 अंक प्राप्त कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया. प्रथम श्रेणी से पास मुस्कान जीवविज्ञानं में रूचि रखती है पर वो भविष्य में शिक्षक बन गाँव के गरीब बच्चों को पढाना चाहती है. वर्तमान सफलता ने मुस्कान के भीतर अपने सपनो को साकार करने की एक बार फिर से आस जगा दी है, क्योंकि घर की बढती जिम्मेवारियों की वजह से एक बारगी वो अपनी पढाई छोड़ने तक के बारे में सोचने लगी थी. उसी दौरान मुस्कान की भेंट जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की वीणा कुमारी से हुयी. वीणा कुमारी ने न सिर्फ उसे पढाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया बल्कि निःशुल्क कोचिंग सेंटर, अख्तियारपुर से जुड़ने में भी सहयोग किया. आज मुस्कान बहुत खुश है साथ ही कहती है की अगले दो साल मुझे और भी मेहनत करने की जरुरत होगी. मुस्कान के माता पिता रेखा देवी तथा जय साह को भी अपनी बेटी पर गर्व है. उन्होंने आगे की पढाई में उसे भरपूर सहयोग देने का निश्चय करते हुए मुस्कान का मनोबल बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाली जेजेबीवीके की कार्यकर्ता वीणा का भी धन्यवाद किया.
अख्तियारपुर कोचिंग केंद्र के शिक्षक किसलय कुमार को मुस्कान के साथ ही चाँदनी सहित अपने कोचिंग केंद्र की अन्य बारह छात्राओं पर भी काफी गर्व है. चांदनी पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी है जिसकी रूचि सामाजिक विज्ञान में है और बड़ी होकर वह भी शिक्षक बनना चाहती है. आगे की पढ़ाई के लिए वो केएसआर कॉलेज, सरायरंजन में नामांकन कराना चाहती है, जो उसके गाँव से 7 किलोमीटर दूर है. किसलय कुमार ने बताया कि बिषम परिस्थितियों से जूझती हुयी इन तमाम बच्चियों ने बहुत लगन से पढाई कर बोर्ड परीक्षा में सफलता प्राप्त किया है. भविष्य में भी इन्हें अगर उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहा तो ये सभी छात्रायें कभी हार नही मानेंगी. क्योंकि इन्होंने बुलंद हौसले के साथ चुनौतीपूर्ण स्थितियों में वर्तमान सफलता पाई है.
क्राई संस्था के पूर्वी क्षेत्र की कार्यक्रम प्रमुख महुआ चटर्जी ने सभी छात्राओं की सफलता पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि “इन बच्चियों ने जो उपलब्धि हासिल किया है, वह उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है. लेकिन मुझे इस बात की ख़ुशी है कि दीप, जेजेबीवीके तथा उसकी अन्य सहयोगी संस्थाओं ने उनकी सफलताओं में निःशुल्क कोचिंग केन्द्रों के माध्यम से अपना योगदान दिया. बिहार के दो सुदूर जिलों में इन छात्राओं ने विषम परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनो को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है. इन निःशुल्क कोचिंग सेंटरों की अहम भूमिका बच्चियों द्वारा बोर्ड की परीक्षा में प्राप्त किये गए अंक इसको परिलक्षित करती है.


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