बिहार में कोरोना; मुख्यमंत्री भड़के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव पर, हाईकोर्ट ने भी माँगा है जवाब

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लंबे अंतराल के बाद शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुयी बिहार कैबिनेट की बैठक में दो दर्जन से अधिक एजेंडे को स्वीकृति दी गयी पर कैबिनेट की बैठक में आज वह हुआ जो संभवतः पिछले 15 वर्षों में नहीं हुआ था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत की जमकर क्लास लगा दी. इसके पूर्व पटना हाईकोर्ट ने भी स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से जवाब तलब किया था.
कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर दी कि विभागीय प्रधान सचिव मेरी बात ही नहीं सुनते, विभाग में अपनी मनमानी करते हैं. इसके बाद तो नीतीश कुमार हत्थे से उखड़ गए और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को जमकर फटकार लगाते हुए यहाँ तक कह दिया अगर विभाग नहीं संभलता है तो छोड़ दीजिए. मुख्यमंत्री ने पूछा कि जब दिल्ली में हर दिन 38,000 कोरोना जांच हो सकता है तो बिहार में क्यों नहीं? मुख्यमंत्री ने कुमावत सिंह से कहा कि किसी भी हाल में बिहार में जांच का दायरा बढ़ाया जाए. राज्य में आरटीपीसी हर दिन 20 हजार नहीं हुआ तो हम एक्शन लेंगे.
कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर काफी नाराज थे. उन्होंने जब इस पर मंत्री और प्रधान सचिव से जानकारी लेनी शुरू की तब मंगल पांडे ने शिकायती लहजे में कहा कि प्रधान सचिव मेरी कोई बात सुनते ही नहीं, अपनी मनमानी करते हैं. मुख्यमंत्री इस बात पर नाराज थे कि स्वास्थ्य विभाग की विफलता के कारण उनके 14 साल के तमाम कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं, सारी मेहनत बेकार हो रही है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर व्यवस्था और हालात नहीं सुधरे तो जल्द ही स्वास्थ विभाग के काम की समीक्षा करेंगे और गड़बड़ी करने वालों पर एक्शन लेंगे.
कैबिनेट ने COVID-19 में कर्तव्य निभाने के क्रम में संक्रमण के फलस्वरूप मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों को विशेष पारिवारिक पेंशन की स्वीकृति देते हुए निर्णय लिया कि संबंधित सरकारी सेवक के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति एवं पूर्व से विद्यमान अन्य लाभ दिया जाएगा. अनुकम्पा का लाभ नहीं लेना चाहतें है तो सरकारी सेवक को प्राप्त अंतिम शुद्ध भुगतेय वेतन आश्रित को विशेष पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा. पेंशन योजना के मामले में सेवानिवृत्ति की तिथि के उपरान्त उन्हें पारिवारिक पेंशन देय रहेगा. यह प्रावधान एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक के लिए लागू रहेंगे.
मुख्यमंत्री ने बाद में कोरोना संक्रमण की अद्यतन समीक्षा करते हुये कहा कि जो लोग भी जाँच कराना चाहते हैं, उनकी डिमांड बेस्ड टेस्टिंग सुनिश्चित करायी जाय. मुख्यमंत्री ने आरटीपीसीआर से भी टेस्टिंग बढ़ाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के इलाज की अच्छी व्यवस्था हो और इसमें लोगों को कोई परेशानी न हो, इसे सुनिश्चित किया जाय. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कोरोना संक्रमित मरीजों के बेड के पास आक्सीजन सिलेंडर एवं अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ उन्हें गुणवतापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध करना सुनिश्चित कराया जाय. स्वास्थ्य विभाग सैंपल्स के रिजल्ट को कम से कम समय में अधिकतम 24 घंटे में लोगों को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे.
पटना हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ही राजधानी सहित पूरे बिहार में कोरोना के बढ़ते संकट और प्रभावित मरीजों के जांच व इलाज की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए शुक्रवार को राज्य सरकार से सात अगस्त तक जवाब तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एस कुमार की खंडपीठ ने राज्य में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से पूछा है कि पूरे राज्य में कितने कोरोना मरीजों की अब तक जांच की गयी है, कितने मरीजों की जांच की जानी है. कोविड-19 अस्पताल के रूप में कितने अस्पताल को नोटिफाई किया गया है. राज्य में कितने आइसोलेशन सेंटर हैं और वहाँ मरीजों को क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं? उन अस्पतालों में डॉक्टरों और पारा मेडिकल कर्मियों की संख्या, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं वहाँ उपलब्ध वेंटीलेटर की संख्या कितनी है? कोरोना से मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार करने के लिए सरकार द्वारा क्या तरीका अपनाया जा रहा है?
उधर कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए पटना शहर के पांच निजी अस्पतालों द्वारा अब तक किसी प्रकार की तैयारी नहीं करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पटना के DM कुमार रवि ने शुक्रवार को ही इन अस्पतालों के प्रबंधकों से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा था. जिलाधिकारी ने 17 जुलाई को निजी अस्पतालों के प्रबंधकों के साथ बैठक कर उन्हें अपने अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाने और बेड आरक्षित करने का निर्देश दिया था़. उनका जबाव संतोषजनक नहीं पाए जाने पर बिहार एपेडमिक डिजीज, कोविड-19 रेगुलेशन 2020 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है. जिन्हें जवाब माँगा गया है उनमें हाईटेक इमरजेंसी, राजेश्वर हॉस्पिटल, जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल, सहयोग हॉस्पिटल तथा मिडभर्सल हॉस्पिटल पटना शामिल हैं.
शुक्रवार को ही पटना सदर एसडीओ तनय सुल्तानिया ने गांधी मैदान के समीप स्थित अंटा घाट स्थित सब्जी मंडी को मास्क नहीं लगाने व सोशल डिस्टैंसिंग के नियमों का उल्लंघन करने पर तीन दिनों के लिए बंद कराते हुए मंडी के अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा मंदी को सैनिटाइज कराया जा रहा है. ज्ञात है कि नियमों का पालन नहीं करने के कारण पटना की कई सब्जी मंडियों को पूर्व में बंद कराया जा चुका है. राज्य की सबसे बड़ी दवा मंडी गोविंद मित्रा रोड भी कोरोना के कारण प्रभावित हुयी है. यहाँ के 25% दवा दुकानदार या उनके कर्मी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जिससे लगभग चौथाई दवा दुकानों पर ताले लग चुके हैं.
-दिनेश कुमार, पत्रकार की कलम से



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