कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता पूर्व कानून एवं न्याय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि संसद से पारित हो चुके नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने से कोई भी राज्य किसी तरह से इनकार नहीं कर सकता और ऐसा करना असंवैधानिक होगा.
सिब्बल ने केरल साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कहा कि जब CAA पारित हो चुका है तो कोई भी राज्य यह नहीं कह सकता कि मैं उसे लागू नहीं करूंगा. यह संभव ही नहीं है क्योंकि यह असंवैधानिक है. आप उसका विरोध कर सकते हैं, विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सकते हैं और केंद्र सरकार से (कानून) वापस लेने की मांग कर सकते हैं लेकिन यह कहना कि मैं इसे लागू नहीं करूंगा संवैधानिक रूप से काफी समस्याएं पैदा कर सकता है.
हाँलाकि बाद में सफाई देते हुए कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय इसे संवैधानिक करार देती है तो इसका विरोध करना मुश्किल हो जाएगा, मगर हमारी लड़ाई जारी रहेगी. असल में कांग्रेस पार्टी नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को असंवैधानिक और धर्म के आधार पर बांटने वाला बताते हुए लगातार इसका विरोध कर रही है. पार्टी के स्टैंड के खिलाफ बयान देने के दुसरे ही दिन कपिल सिब्बल ने अपने बयान को दूसरा मोड़ दिया है.
कपिल सिब्बल ने अपने बयान पर सफाई देते हुए ट्विटर पर लिखा- “मेरा मानना है कि CAA असंवैधानिक है. हर राज्य विधानसभा के पास यह संवैधानिक हक है कि वह प्रस्ताव पारित कर इसे वापस लेने की मांग कर सकती है. यदि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कानून को संवैधानिक घोषित कर दिया जाता है तो उसका विरोध करना मुश्किल हो जाता है, लड़ाई जारी रहेगी.”
सिब्बल के बयान से मिलता जुलता बयान एक अन्य वरिष्ट नेता और अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने देते हुए कहा कि- ‘यदि उच्चतम न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करती है तो यह कानून की पुस्तक में रहेगी और यदि कुछ भी कानून की पुस्तक में रहती है तो आपको कानून का पालन करना ही होगा वरना इसके गंभीर परिणाम होंगे. जहां तक इस कानून का संबंध है यह ऐसा मामला है जहां राज्य सरकारों और केंद्र के बीच गहरे मतभेद हैं. इसलिए हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार करेंगे. अंततः अदालत ही तय करेगा और तब तक सब कुछ कहा, किया या नहीं किया गया अल्पकालीन और अस्थायी है.
कांग्रेस के अन्य नेता जयराम रमेश ने भी इससे मिलती-जुलती टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं उतना निश्चित नहीं हूँ कि राज्य सरकारें जो ये कह रही है कि वो यह कानून लागू नहीं करेंगे अदालत में उनका कितना पक्ष सुना जाएगा? मुझे पता है कि केरल सरकार ने एक प्रस्ताव पास किया है, लेकिन यह एक राजनीतिक प्रस्ताव है. ये न्यायिक प्रक्रिया का कितना सामना कर पाएगा इस बारे में मैं शत- प्रतिशत सुनिश्चित नहीं हूँ.
केरल साहित्य उत्सव के दौरान सिब्बल ने कहा था कि जब सीएए पारित हो चुका है तो कोई भी राज्य यह नहीं कह सकता कि मैं उसे लागू नहीं करूंगा. राज्यों का कहना कि वे राज्य के अधिकारियों को भारत संघ के साथ सहयोग नहीं करने देंगे, वे ऐसा कैसा करेंगे? NRC एनपीआर पर आधारित है और NPR को स्थानीय रजिस्ट्रार लागू करेंगे. अब गणना जिस समुदाय में होनी है वहां से स्थानीय रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने हैं और वे राज्य स्तर के अधिकारी ही होंगे. व्यावहारिक तौर पर ऐसा कैसे संभव होगा यह मुझे नहीं पता, लेकिन संवैधानिक रूप से किसी राज्य सरकार द्वारा यह कहना बहुत कठिन है कि वह संसद द्वारा पारित कानून लागू नहीं करेगी.


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