सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को एक अलग तरह के मामले की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर सुनवाई की। जस्टिस गोगोई ने उन पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर एवं खुद को इससे अलग करते हुए मामले की सुनवाई के लिए एक बैंच का गठन किया है। साथ ही उन्होंने इस तरह के आरोपों को न्यायपालिका के खिलाफ साजिश करार देते हुए न्यायपालिका को खतरे में बताया।
CJI गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की ही एक पूर्व कर्मचारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह के आरोप न्यायपालिका की स्वायतता के खिलाफ साजिश हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर शनिवार को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना ने की।
सालिसिटर जनरल तुषार मेहता के आग्रह पर शनिवार को कोर्ट ने मामले को न्यायपालिका की स्वायत्ता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सुनवाई की। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि वह मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नही लगा रहे हैं, लेकिन उम्मीद करते हैं कि मीडिया तथ्यों को जांचे बगैर इस तरह न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले फर्जी आरोप नहीं छापेगा और जिम्मेदारी से काम करेगा।
जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि वह अगले सप्ताह कुछ महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करने वाले थे, इसलिए उनको निशाना बनाया गया है। बता दें कि कोर्ट अगले सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अवमानना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवनी पर आधारित फिल्म और तमिलनाडु चुनाव पर सुनवाई करने वाला है। महिला की शिकायत पर उचित पीठ बाद मे सुनवाई करेगी।


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