मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों को न्यायपालिका की स्वायत्ता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए शनिवार को सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा कि वह मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नही लगा रहे हैं, लेकिन उम्मीद करते हैं कि मीडिया तथ्यों को जांचे बगैर इस तरह न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले फर्जी आरोप नहीं छापेगा और जिम्मेदारी से काम करेगा।
CJI गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी के 22 पन्नों का एक हलफनामा सामने आया है. जिसमें पूर्व कर्मचारी ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न और घटना के बाद उसके परिवार को परेशान करने का आरोप लगाया है. जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के तौर पर काम करने वाली महिला ने आरोप लगया है कि चीफ जस्टिस गोगोई ने पिछले वर्ष अक्टूबर को अपने ऑफिस में ‘जबरदस्ती करने’ की कोशिश की. जब मैंने मांग ठुकरा दिया तो, मुझे नौकरी से निकाल दिया.
जस्टिस गोगोई ने आरोपों को सिरे से खारिज कर एवं खुद को इससे अलग करते हुए मामले की सुनवाई के लिए एक बैंच का गठन किया. साथ ही उन्होंने इस तरह के आरोपों को न्यायपालिका के खिलाफ साजिश करार देते हुए न्यायपालिका को खतरे में बताया. गोगोई ने कहा कि 20 सालों की सेवा के बाद मेरे खाते में सिर्फ 6 लाख 80 हजार रुपए हैं, कोई भी मेरा बैंक अकाउंट चेक कर सकता है. मेरे चपरासी के पास मुझसे ज्यादा पैसे हैं. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता. लोग पैसे के मामले में मुझ पर उंगली नहीं उठा सकते, इसलिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं. गोगोई ने कहा कि इसके पीछे कोई एक शख्स नहीं, बल्कि कई लोगों का हाथ है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मैं आरोपों पर कोई जवाब नहीं देना चाहता. अगले सप्ताह SC को कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होनी है, इसलिए मुझे जानबूझकर फंसाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह कुछ महत्वपूर्ण मामलों यथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर अवमानना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवनी पर आधारित फिल्म और तमिलनाडु चुनाव पर सुनवाई करने वाले हैं.


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