CJI के खिलाफ महाभियोग के लिए कांग्रेस ने ड्राफ्ट बनवाकर बंटवाया, विरोधी दल आए साथ

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देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ जल्द ही संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है. कांग्रेस ने महाभियोग से संबंधित एक ड्राफ्ट तैयार कर अन्य दलों के बीच बंटवाया है, जिसपर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत कई पार्टियों के नेताओं ने दस्तखत किए हैं.
अभी सदन में नोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए संघर्ष जारी है, इसलिए संभव है कि बजट सत्र के अंतिम दिनों में या फिर बाद में मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग प्रस्ताव आये. कांग्रेस के कई बड़े नेता पहले महाभियोग लाने के खिलाफ थे, परन्तु कई भाजपा विरोधी दल चाहते हैं कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मौजूदा परिस्थितियों में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए. जनवरी महीने में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा था कि सीजेआई के खिलाफ महाभियोग यानी इमपीचमेंट मोशन लाने के लिए विपक्षी पार्टियों से बात हो रही है.
सीजेआई दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी लोकुर ने 12 जनवरी 2018 को संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है. इन्होंने सीजेआई पर पक्षपात करने, मुकदमों के बंटबारे में नियम का पालन नहीं करने तथा सीबीआई जज लोया की मौत की जांच में कोताही बरतने का आरोप लगाया था. जजों द्वारा इस तरह से मीडिया में आकर सुप्रीम कोर्ट के अंदर की बात जगजाहिर करना देश के न्यायिक इतिहास की बड़ी और ऐतिहासिक घटना थी. जस्टिस मिश्रा 27 अगस्त, 2017 को सीजेआई जे एस खेहर के सेवानिवृत्ति के बाद भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश बने, जिनका कार्यकाल 2 अक्टूबर, 2018 को समाप्त हो रहा है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) में न्यायधीशों पर महाभियोग का उल्लेख है. जिसके तहत सुप्रीमकोर्ट या हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश पर साबित कदाचार या अक्षमता के लिए महाभियोग का प्रस्ताव संसद में लोकसभा के 100 सांसदों या रायसभा के 50 सांसदों की स्वीकृति के बाद लाया जा सकता है. जिस सदन में यह प्रस्ताव रखा जाता है वह इसे जांच के लिए दूसरे सदन को भेजता है, सदन में न्यायाधीशों पर लगे आरोपों की जांच के नतीजे को बहुमत से पारित कर दूसरे सदन में भेज दिए जाते हैं. इस प्रस्ताव पर फिर मतदान होता है और दो तिहाई मतों से मंजूरी के बाद फैसला होता है कि अमुक न्यायाधीश पद पर बने रहेंगे या हटाये जायेंगे.
विपक्षी पार्टियां सीजेआई के खिलाफ महाभियोग लाती है तो देश के न्यायिक इतिहास में वो तीसरे जज होंगे जिनके खिलाफ महाभियोग आएगा. वर्ष 1993 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी रामास्वामी पर महाभियोग लाया गया था जो लोकसभा में ही गिर गया था. इसके बाद 2011 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन को महाभियोग का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने लोकसभा में इसका सामना करने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था.


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