चीन के वैज्ञानिकों ने बंदर और सुअर के जीन्स का प्रयोग करते हुए एक नया जानवर पैदा किया है. चीनी वैज्ञानिकों ने बंदर और सुअर के जीन्स से किए गये इस नए प्रयोग से पैदा जानवर को बंदर-सुअर प्रजाति नाम दिया है. हाँलाकि कुछ वैज्ञानिकों ने प्रयोग पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इस तरह के प्रयोग से कई नैतिक चिंताएं जन्म ले रही हैं.
चीनी वैज्ञानिकों ने अपने इस नए प्रयोग में दो बच्चे पैदा किए थे, जिनकी एक सप्ताह के अंदर ही मौत हो गई. बीजिंग की स्टेट सेल की प्रमुख प्रयोगशाला और प्रजनन जीवविज्ञान में हुए इस प्रयोग के संदर्भ में वहां के एक वैज्ञानिक तांग हाइ के अनुसार यह पूरी तरह से बंदर-सुअर की पहली रिपोर्ट है. हाँलाकि बंदर-सुअर के दोनों बच्चे मर गए. उस पिगलेट भ्रूण में बंदर की स्टेम कोशिकाएं थीं, जोकि एक समृद्ध प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए उसमें समायोजित की गई थीं, जिससे शोधकर्ताओं को यह पता लगाने में मदद मिली कि कोशिकाएं कहां समाप्त हुयीं. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इनकी मृत्यु क्यों हुई, पर माना जा रहा है कि इनकी मौत IVF प्रक्रिया में किसी तरह की समस्या की वजह से हुई होगी.
देश-दुनिया के वैज्ञानिक रोज नई- नई खोज में लगे रहते हैं, परन्तु कुछ वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग पर चिंता भी व्यक्त की है. चिंता जाहिर करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि ये प्रयोग नैतिक आधार पर नहीं किए गए हैं, जिससे कई नैतिक चिंताएं पैदा हो रही हैं. कनाडा के किंग्स्टन में क्वीन्स यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंटिस्ट डगलस मुनोज ने कहा कि इस तरह की शोध परियोजनाएं वास्तव में मुझे नैतिक रूप से डराती हैं. हमें इस तरह से जीवन के कार्यों में हेरफेर नहीं करना चाहिए. यदि इस तरह का कोई प्रयोग किया भी जा रहा है तो उसमें सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो किस वर्ग के लाभ के लिए किया जा रहा है.
इससे पहले चीन ने बंदरों में मानव दिमाग लगाने का एक प्रयोग शुरू किया था, उनका इस तरह का प्रयोग करने का उद्देश्य अल्जाइमर जैसे रोगों पर रिसर्च करना था मगर उस पर भी रोक नहीं लगाई जा सकी थी. जनवरी 2017 में सैन डिएगो के इंस्टीट्यूट में एक मानव- सुअर संकर भ्रूण बनाया गया था, लेकिन 28 दिन बाद ही उसकी मृत्यु भी हो गई थी.


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