आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए नए आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म को अधिसूचित कर दिया है, जिसमें इस बार कुल दस बदलाव किये गये हैं. आईये जानते हैं उन बदलावों के बारे में.
हाँलाकि पिछले साल की तरह इस साल भी ITR के लिए सात प्रकार के फॉर्म ही होंगे. सामान्यतया विभाग हर साल ITR फॉर्म्स को अपडेट कर नए फॉर्म को अधिसूचित करता है. आयकर विभाग के फाइलिंग पोर्टल www.incometaxindiaefiling.gov.in पर ITR -1 तथा ITR- 4 फॉर्म पहले से ही उपलब्ध हैं. अन्य फॉर्म भी पोर्टल पर जल्द उपलब्ध होने की संभावना है. चलिए हम आपको बताते हैं ITR के फॉर्म्स में होने वाले दस बदलाव के बारे में:-
फॉर्म ITR-1 भरने वालों को याद रखना आवश्यक है कि उन्हें भारतीय पता और मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया गया है. अब ITR-4 फॉर्म का इस्तेमाल कंपनियों के निदेशक, गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में शेयर रखने वाले व्यक्ति और एक से अधिक मकान रखने वाले लोग नहीं कर सकेंगे.
अब तक एक से अधिक मकान पर टैक्स देना पड़ता था, लेकिन अब इसका नियम बदल गया है. अब अगर आपके पास दो मकान हैं और दूसरा खाली है, तो उसे भी सेल्फ-ऑक्युपाइड (अपने ही पास) माना जाएगा और आपको नोशनल रेंट (काल्पनिक किराये) पर टैक्स नहीं देना होगा. इसके लिए ITR-1 तथा ITR-4 में ‘डीम्ड लेट आउट’ के विकल्प का चयन करना होगा. साथ ही, अगर मकान मालिक द्वारा किरायेदार का TDS काटा जाता है तो इस स्थिति में किरायेदार का पैन नंबर भी देना होगा.
सैलरी वालों को सैलरी के अलावा, इसके अन्य कंपोनेंट का भी खुलासा करना होगा. सैलरी से स्टैंडर्ड डिडक्शन को एक अप्रैल, 2018 से लागू किया गया था. ये बदलाव ITR फॉर्म में प्रदर्शित होंगे. इसके अलावा, सैलरीड एंप्लॉयी को वैल्यू ऑफ परक्विजिट्स, प्रॉफिट इन लियू ऑफ सैलरी, एक्जेम्प्ट अलाउंसेज और इंटरटेनमेंट अलाउंसेज के लिए डिडक्शन, प्रफेशनल टैक्स और स्टैंडर्ड डिडक्शन को अलग-अलग दर्शाना होगा.
आयकर नियमों के मुताबिक, अगर संपत्ति की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक होती है तो इसके खरीदार को एक फीसदी की दर से TDS काटना है. विक्रेता द्वारा ऐसी जानकारी का खुलासा करने के लिए ITR फॉर्म में संशोधन किया गया है. साथ ही, सूचीबद्ध इक्विटी शेयर्स और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस एक अप्रैल से टैक्सेबल हो गया है, इसलिए इससे जुड़ा संशोधन भी ITR फॉर्म में नजर आएगा.
अगर आपने बैंक सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट्स और इनकम टैक्स रिफंड पर ब्याज से आय का उपार्जन किया है तो इसके बारे में आपको विस्तृत जानकारी देनी होगी.
अगर आप बार-बार विदेश यात्रा पर जाते हैं तो आपको इसके बारे में विस्तृत जानकारी देने की जरूरत पड़ेगी. आपको भारत में तथा विदेश में बिताए गए दिनों की जानकारी भी आयकर विभाग को देनी पड़ेगी. अब आवास संबंधी स्टेटस पर केवल सेल्फ-डिक्लयरेशन से ही काम नहीं चलेगा.
अगर किसी NRIका भारत में आय का कोई स्रोत है तो उसे ITR फाइल करना पड़ेगा. नए ITR फॉर्म में निवास स्थान, टैक्सपेयर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर, अगर भारतीय नागरिक हैं या भारतीय मूल के नागरिक हैं तो भारत में कितने दिन रहे इसका विवरण देना होगा.
फॉरेन बैंक अकाउंट्स के अलावा, फॉरेन डिपॉजिटरी अकाउंट्स का विवरण भी देना होगा. ITR में फॉरेन कस्टोडियल अकाउंट्स, फॉरेन इक्विटी ऐंड डेट की जानकारी, विदेशी मुद्रा ऐर बीमा की जानकारी भी देनी पड़ेगी, ये जानकारियां न देने पर आप मुसीबत में पड़ सकते हैं.
इसके अलावे भी कई और बदलाव ITR में किए गए हैं. अगर आपने किसी धर्मार्थ संस्थान को कोई डोनेशन दिया है और आपको रिटर्न के समय दान राशि की जानकारी देनी होगी. पांच लाख रुपये से अधिक की कृषि आय वाले व्यक्ति को पिन कोड के साथ जिला का नाम, भूमि का विवरण, भूमि अपनी है या किराये पर ली गई है और यह कृषि योग्य है या कुछ और इसका पूरा विवरण देना होगा.


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