BJP के लिए चुनाव नहीं, चुनौती है गुजरात विधानसभा चुनाव : शत्रुघ्न सिन्हा

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भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी पर एकसाथ जमकर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों में GST एवं नोटबंदी को लेकर काफी गुस्सा है और गुजरात विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए महज एक चुनाव नहीं बल्कि चुनौती है.
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के साथ एक मंच साझा करते हुए कहा कि ‘‘अगर एक वकील वित्तीय मामलों की बात कर सकता है, अगर एक टीवी अभिनेत्री मानव संसाधन विकास मंत्री बन सकती हैं और एक ‘चायवाला’ भी PM बन सकता है तो, मैं अर्थव्यवस्था की बात क्यों नहीं कर सकता? हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, पर इशारा साफ तौर पर अरुण जेटली, स्मृति ईरानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ था.
सिन्हा ने यह कहा कि वह अपनी पार्टी को चुनौती नहीं दे रहे बल्कि राष्ट्रीय हित में उसे आईना दिखा रहे हैं. जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी को लेकर लोगों के गुस्से को देखते हुए मैं यह नहीं कहना चाहता कि भाजपा को कितनी सीटें मिलेंगी लेकिन निश्चित तौर पर ये चुनाव एक विशेष चुनौती होने जा रहे हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी एकजुट रहकर अपनी सीटें बढ़ा सकती है पर उसे चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए. मैं बस इतना कहूंगा कि मामला गंभीर है और ये चुनाव नहीं बल्कि चुनौती हैं.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सरकार को देश चलाने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे विपक्ष के विशेषज्ञ एवं ज्ञानी लोगों तथा दूसरे लोगों से सुझाव मांगने चाहिए. उन्होंने अरुण जेटली द्वारा वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा पर ‘‘80 साल की उम्र में नौकरी के आवेदक’’ संबंधी तंज कसने को लेकर कहा कि वह (जेटली) खुद अपनी नौकरी से हाथ धो सकते हैं लेकिन दूसरों के लिए नौकरी सुझा रहे हैं.
इससे पहले सिन्हा ने अपने संबोधन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी को राजनीतिक क्षेत्र में उम्मीद की एक किरण बताते हुए दुख जताया कि पूर्व उप प्रधानमंत्री को कोई पद नहीं दिया गया. किसी का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें राष्ट्रपति बनाना तो दूर मंत्री तक नहीं बनाया गया.
गुजरात विधानसभा चुनाव को एक ‘बड़ी चुनौती’ बताते हुए कहा कि इससे पार तभी पाया जा सकता है जब यह ‘वन मैन शो’ और ‘दो-सैनिकों की सेना’ की मानसिकता से बाहर आए. भाजपा का पुराना कार्यकर्ता होने के नाते हमारी भावना हमेशा अपनी पार्टी के साथ है.

उन्होंने पार्टी नेतृत्व के ‘अहंकार’ को गुजरात में पाटीदार आंदोलन के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि पार्टी के कद्दावर नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी की क्या गलती है? या तो उन्हें दरकिनार कर दिया गया अथवा वह पराए कर दिए गए हैं, जबकि हम सब एक परिवार के समान हैं. सरकार एवं संगठन चला रही व्यवस्था को ‘एक आदमी की सेना’ और ‘दो आदमी का शो’ करार डरते हुए कहा कि इस सरकार के मंत्री ‘खुशामदीदों की टोली’ हैं, इनमें से 90 फीसदी को कोई नहीं जानता.
अपनी विफलताओं पर ईमानदारी के साथ गौर करने की आवश्यकता है. हम इससे इनकार नहीं कर सकते कि नोटबंदी के कारण कई लोगों की नौकरी गयी और जैसा कि वादा किया गया, उस हिसाब से कालाधन नहीं निकल सका. जीएसटी एक जटिल कर प्रणाली प्रतीत होती है जिससे केवल चार्टर्ड एकाउंटेंट को लाभ पहुंच रहा है.
इसके पूर्व अपने ‘दिल की बात’ बताते हुए सिन्हा ने कहा था कि ‘किसी और ने ‘मन की बात’ पेटेंट करा रखी है. आजकल ऐसा माहौल है कि या तो आप एक शख्स का समर्थन करें या देशद्रोही कहलाने के लिए तैयार रहें. भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी के बहुचर्चित नारे ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ पर कटाक्ष करते हुए सिन्हा ने कहा था कि आजकल हो ये रहा है कि ‘ना जियूंगा, ना जीने दूंगा.’
कोई अन्य विकल्प ढूंढने की चर्चाओं को खारिज करते हुए सिन्हा ने कहा कि वह भाजपा को छोड़ने के लिए इसमें शामिल नहीं हुए थे. यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं, सिन्हा ने अपने जाने पहचाने संवाद के साथ जवाब दिया……. ‘‘खामोश’’

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