बिहार में बेटियों और बहनो को स्कूल जाने के लिए साईकिल तो दे दी गयी, परन्तु सुरक्षा देने में राज्य सरकार विफल है. एसिड अटैक पीडि़तों को तीन वर्षो के बाद भी सरकार से सहायता राशि नहीं मिलना प्रशासन के असंवदेनशील रवैये का स्पष्ट प्रमाण है.
हम सेक्युलर नेता व अल्पसंख्यक एवं दलित महासभा के प्रदेश अध्यक्ष फैज़ सिद्दीकी ने बिहार में लगातार बढ़ रही एसिड अटैक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की सुशासन बाबू की सरकार में बेटियों और बहनो को स्कूल जाने के लिए साईकिल तो दे दी, परन्तु उन्हें सुरक्षा देने में सरकार विफल हो गई है. प्रदेश में एसिड अटैक की घटनायें आये दिन हो रही है, ऐसे में हमारी बेटियों के सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी शर्मनाक और भयावह घटनाओं से उन सभी लड़कियों का मनोबल गिरेगा, जो समाज में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिला कर चलने और कुछ कर गुजरने का हौसला रखती हैं. साथ ही सिद्दीकी ने कहा की समाज को भी अपनी मानसिकता बदलने की आवश्यकता है. सामाजिक कार्य और बेटियों की सुरक्षा पर काम कर रहे सामाजिक संगठनों को भी पूर्ण रूप से इस तरह की घटनाओं के विरुद्ध सक्रिय होने की आवश्यकता है.
सिद्दीकी ने कहा कि भागलपुर की सत्रह वर्षीया नाबालिग बेटी के मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए DGP गुप्तेश्वर पांडेय द्वारा दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करना और भागलपुर के SP द्वारा मुख्य आरोपी को हिरासत में लेना एक सराहनीय कदम जरुर है. पर आगे ऐसी निंदनीय घटनायें न हों और इस तरह के मामले में प्रसाशन और आम लोगों की जागरूकता भी आवश्यक है. इस संदर्भ में उच्च स्तर पर निगरानी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कठोरतम कारवाई सुनिश्चित होनी चाहिए.

हम नेता ने बिहार में बेलगाम होते अपराधियों की चर्चा करते हुए कहा कि भागलपुर में घर में घुसकर लड़की को तेजाब से नहलाने की घटना के 24 घंटे के अंदर एक मामला गोपालगंज में हो गया. वहाँ मीरगंज थाना क्षेत्र में स्कूटी से जा रही हथुआ प्रखंड की एक 32 वर्षीया आशा कार्यकर्ता को दो बाइक सवार युवकों ने तेजाब फेंक कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया. सड़क पर छटपटा रही उस महिला को लोगों ने उठाकर उचकागांव अस्पताल पहुंचाया. पीडिता शनिवार को मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थी. तभी हेलमेट पहने हुए दो लोगों ने पीछे से बाइक ओवरटेक कर उस पर तेजाब फेंक दिया.
हम नेता फैज़ सिद्दीकी ने कहा कि भागलपुर के अलीगंज में शुक्रवार की शाम माँ के सामने सामूहिक दुष्कर्म में असफल रहने पर चार दरिंदों द्वारा एक सत्रह वर्षीया नाबालिग छात्रा को तेजाब से नहलाने के बाद उसे बेहद गंभीर हालत में मायागंज अस्पताल ले जाया गया था. इतना गंभीर मामला होने के बाद भी पीडि़ता को घंटों बेड नहीं मिला, स्ट्रेचर पर ही उसे लेकर लोग घंटों खड़े रहे. हमले में छात्रा की मां का बायां कंधा भी एसिड पडऩे से झुलस गया था, बावजूद इसके वो 50 फीसद झुलस चुकी अपनी बेटी को अस्पताल में पंखा झेलती रही. अस्पताल की कुव्यवस्था के कारण वहाँ पहुंचे तमाम लोगों में भारी आक्रोश रहा.
सिद्दीकी ने कहा कि राज्य सरकार का रवैया एसिड अटैक की पीड़ितों के प्रति काफी उपेक्षापूर्ण रहा है. भागलपुर जिले में ही तीन एसिड अटैक पीडि़तों को तीन वर्षो के बाद भी आजतक सरकार से सहायता राशि नहीं मिल पायी है, जो प्रशासन के असंवदेनशील रवैये का प्रमाण है. पीडि़त मुआवजे के लिए सरकारी अफसरों के चक्कर काट रहे हैं. अब उन्हें प्रधानमंत्री राहत कोष का दरवाजा खटखटाने को कहा जा रहा है.
सिद्दीकी ने कहा कि तीन- तीन वर्ष तक सहायता नहीं मिलना सारी सच्चाई स्वयं बयाँ करती है. जबकि जस्टिस जे.एस. वर्मा कमीशन की सिफारिशों पर सरकार IPC तक में नए कानूनी प्रावधान कर धारा 326 ए और 326 बी अस्तित्व में लाई है. एसिड अटैक की शिकार महिला को इलाज और पुर्नवास के लिए तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है. बिहार सरकार ने पीडि़त एक्ट बनाकर मुआवजा का प्रावधान भी कर रखा है. जबकि एसिड अटैक के मामलों में “नेशनल लीगल सर्विसेज अर्थारिटी” मुआवजा राशि पांच लाख रुपये से लेकर सात लाख रुपये तक है. नौ नवंबर 2016 के बाद से एसिड अटैक पीडि़तों को प्रधानमंत्री राहत कोष से भी एक लाख रुपये मुआवजा मिलता है.


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