अंतिम चरण का मतदान होने के पूर्व ही नई सरकार बनाने के मामले में विपक्ष ने मोर्चेबंदी शुरू कर दी है. विपक्ष के प्रयासों को देखते हुए कहा जा सकता है कि बहुमत से एक सीट भी कम रहने पर विपक्ष भाजपा को बख्सने वाला नहीं है. सारे विपक्षी नेता भाजपा को सत्‍ता से बाहर रखने के लिए अपने स्तर से प्रयासरत हैं. भाजपा विरोधी सभी दलों को एकजुट करने की बागडोर आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री तथा TDP प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने संभाल रखी है.
चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को नई दिल्‍ली में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ एक घंटे गुफ्तगुं करने के दौरान मतगणना के बाद की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुयी. भाजपा को अगर बहुमत नहीं मिलता है तो अविलम्ब सरकार बनाने का दावा पेश करने की रूपरेखा तक पर विचार किया गया. नायडू NCP अध्‍यक्ष शरद पवार और LJD के शरद यादव से भी मिल रहे हैं. नायडू सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और बसपा अध्‍यक्ष मायावती से मुलाकात करने लखनऊ भी जायेंगे.
राहुल गांधी से मिलने के पहले नायडू ने भाकपा नेताओं सुधाकर रेड्डी और डी. राजा से भी बातचीत की है. ज्ञात है कि वो माकपा नेता सीताराम येचुरी और दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पहले ही मिल चुके हैं. सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी चंद्रबाबू नायडू लगातार टेलीफोनिक सम्बन्ध बनाये हुए हैं. टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव से भी उनकी बात हो चुकी है.
राहुल गांधी द्वारा बीजेपी को सत्ता में वापसी से रोकने के लिए विपक्ष के हर फॉर्मूले पर सहमत रहने संबंधी बयान के दुसरे दिन चंद्रबाबू का उनसे मिलना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हाँलाकि वो सोनिया गांधी से भी मिलना चाहते थे, लेकिन यह आज नहीं हो पाया. उधर शरद पवार और सोनिया गांधी के बीच मुलाकात होने की भी खबर आ रही है. चंद्रशेखर राव केरल के मुख्यमंत्री माकपा नेता पिनरई विजयन और डीएमके नेता एमके स्टालिन से मिल भविष्य का ताना- बाना बुनने में लगे हैं. हालांकि घंटेभर चली यह बैठक कामयाब नहीं रही. डीएमके ने कांग्रेस का साथ छोड़ने से इंकार कर दिया.
यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 23 मई को सभी गैर- एनडीए दलों के नेताओं की बैठक बुलायी है. कांग्रेस ने इस बैठक को सफल बनाने के लिए अहमद पटेल, पी.चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत की एक टीम भी बनाई है. इन तमाम कवायदों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है उत्तर प्रदेश की 80, पश्चिम बंगाल की 42, आंध्रप्रदेश की 25, उड़ीसा की 21 तथा तेलंगाना की 17 कुल 185 सीटों पर सपा, बसपा, टीएमसी, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी एवं टीआरएस द्वारा जीते गये सीट, इसी को ध्यान में रखकर ममता बनर्जी बैठक परिणाम की घोषणा के बाद करने की बात कह रही हैं.


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