सर्वोच्च अदालत ने अयोध्या मामले पर दाखिल सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं. CJI एस ए बोबड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे. इनमें सिर्फ न्यायमूर्ति खन्ना नए सदस्य थे जिन्हें 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए CJI के स्थान पर शामिल किया गया. बाकी सभी 9 नवम्बर को अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल थे.
संविधान पीठ ने चैंबर में सिर्फ उन पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर किया जो इस विवाद से संबंधित मुकदमों में पक्षकार थे. न्यायालय में दायर 18 पुनर्विचार याचिकाओं में से नौ याचिकायें मूल पक्षकारों ने दायर की थीं जबकि शेष याचिकाएं तीसरे पक्ष द्वारा दायर थीं. पीठ ने उन याचिकाओं पर विचार करने से ही इंकार कर दिया जो मूल वाद में पक्षकार नहीं थे.
मुस्लिम पक्ष की तरफ से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIPLB) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका डाली थी. अखिल भारत हिंदू महासभा, शिया सेंट्रल बोर्ड, तहरीक फारुख ए इस्लाम, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, यूथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल लीग एवं 40 नामचीन हस्तियों द्वारा सामूहिक रूप से पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं. स्व. हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी को भी AIPLB ने इस मुद्दे पर हुयी अपनी बैठक में बुलाया था पर उसमें नहीं गये और अपने को पुनर्विचार याचिका से अलग रखा.
फैसले के बाद AIPLB के जफरयाब जिलानी ने कहा कि कोर्ट द्वारा हमारी याचिका को खारिज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. हम अपने वरिष्ठ वकील राजीव धवन से सलाह मशविरा करेंगे, अभी हम नहीं बता सकते कि हमारा अगला कदम क्या होगा?
पूर्व CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से 2.77 एकड़ विवादित भूमि रामलला को देने का फैसला सुनाते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अलग पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था.


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