कोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च तकनीक के इस्तेमाल की है जरूरत : जस्टिस बोबडे

 48 


सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को 46वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने देश की न्याय प्रणाली को काफी अच्छी बताते हुए अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च तकनीक के इस्तेमाल की आवश्यकता बताई. साथ ही उन्होंने अयोध्या मामले में किसी प्रकार के दबाव से इंकार करते हुए कहा कि हम इस मामले को न तो आस्था के हिसाब से देख रहे हैं और न ही सामाजिक प्रभाव के बारे में. हम याचिकाकर्ताओं के दावे की जांच कर रहे हैं और ठोस सबूतों के आधार पर मामले को देख रहे हैं.
मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के 17 नवंबर को रिटायर होने के बाद CJI बनने जा रहे जस्टिस बोबडे ने कहा कि देश में न्याय प्रणाली बहुत अच्छी है. इसे और बेहतर बनाने के लिए समय के अनुसार कुछ बदलाव की जरूरत है. हमें अपनी व्यवस्था में कुछ अतिरिक्त चीजों का इस्तेमाल कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च तकनीक का इस्तेमाल करना है. व्यवस्थाओं में थोडा सुधार करने के साथ ही दीर्घकालीन सुधारों के लिए स्टाफों को कानूनी शिक्षा दी जानी चाहिए.
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की रोजाना सुनवाई कर रही पांच जजों की पीठ का हिस्सा रहे जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम अयोध्या मामले को हिंदू बनाम मुस्लिम के नजरिए से देखते ही नहीं, इसे लेकर हम पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है. लंबे समय से लटके इस मामले को हम आस्था के हिसाब से नहीं देखते और न ही फैसले पर सामाजिक प्रभाव के बारे में सोचते हैं. हम याचिकाकर्ताओं के दावे की जांच कर रहे हैं और सबूतों के आधार पर फैसला देंगे. बाद में कोई क्या करता है उसपर हमें नहीं सोचना.
जस्टिस बोबडे ने नागपुर यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली थी. 29 मार्च 2000 को बॉम्बे हाइकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 16 अक्टूबर 2012 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाये गये. 12 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट में जज बने. 24 अप्रैल 1956 को नागपुर में जन्मे जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल 2021 को रिटायर होंगे.


loading…

Loading…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *