एनडीए के घटक दलों में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा. चुनाव परिणाम आये 6 माह भी नहीं हुए हैं पर JDU, शिवसेना, आजसू के बाद लोजपा ने अपने तेवर दिखा दिए हैं. इसी बीच लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने घटक दलों के बीच समन्वय के लिए NDA में संयोजक बनाये जाने का मुद्दा उठा दिया है. शिवसेना और JDU पहले ही यह मांग उठा चुकी है.
NDA-2 के शपथ ग्रहण के दिन ऐन समय पर एक घटक JDU ने कैबिनेट में शामिल होने से इंकार कर दिया था. तब से JDU और BJP की सरकार बिहार में चल जरुर रही है पर दोनों के बीच उठापटक लगातार जारी है. दोनों के नेता आये दिन बयानों के तीर चलाते रहते हैं.
महाराष्ट्र में चुनाव पूर्व भाजपा और शिवसेना के बीच किसी प्रकार सीटों का बंटवारा तो हो गया पर परिणाम आते ही CM की कुर्सी को लेकर चली खींचतान ने अंततः दोनों की राहें जुदा कर दीं. दोष जिसका हो, बंद कमरे में चाहे जो बातें हुयी हों, NDA का सबसे पुराना गठबंधन टूट गया. देश में पहली बार किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी सरकार ने शपथ ग्रहण नहीं किया.
झारखंड में चुनाव की घोषणा होते ही आजसू और भाजपा में ठन गई, दोनों ने 5 वर्ष वहाँ सरकार चलायी है. आजसू ने अपने 17 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, अभी और नाम आने से इंकार नहीं किया जा सकता. JDU पहले ही वहाँ अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है. अब LJP ने भी वहाँ अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले NDA के घटक दलों की बैठक के बाद रविवार 17 नवम्बर को लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि घटक दलों के बीच समन्वय के लिए NDA कोआर्डिनेशन कमेटी या संयोजक जल्द बनाये जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि घटक दलों के बीच सिर्फ संसद सत्र के दौरान ही नहीं बल्कि समय- समय पर लगातार चर्चा होती रहनी चाहिए.
लोजपा अध्यक्ष ने कहा कि आगामी सत्र में हम सभी एक साथ मिलकर काम करेंगे. आज की बैठक में शिवसेना अनुपस्थित रही, जबकि वह NDA की सबसे पुरानी पार्टी थी. तेलुगू देशम पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने इसके पूर्व NDA छोड़ा, यह चिंता की बात है.
JDU नेता केसी त्यागी पूर्व में ही NDA संयोजक बनाये जाने की मांग करते हुए कहा था कि घटक दलों के बीच समन्वय और बड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संयोजक की सख्त आवश्यकता है. हाल में ही शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत भी इस मामले को कुछ अपने ही अंदाज़ में उठा चुके हैं.


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