भारत को आत्मनिर्भर बनाने की सदियों पुरानी आस हुयी पूरी : मोहन भागवत

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भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिस विश्वास और आत्मभाव की जरूरत थी, वह अधिष्ठान पूर्ण हो रहा है. तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने संकल्प लेने के पहले कहा था कि इसे पुरा होने में 20- 30 साल लगेंगे. आज हमें उस संकल्प पूर्ति का आनंद मिल रहा है. बहुत लोगों ने बलिदान दिए हैं, जो यहाँ सूक्ष्म रूप में उपस्थित हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो यहाँ आ नहीं सकते, आडवाणीजी घर बैठे कार्यक्रम देख रहे होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में उक्त बातें कहीं. श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बने मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास मात्र पांच लोग थे.
उन्होंने कहा कि परम वैभव संपन्न और सबका कल्याण करने वाले भारत के निर्माण का शुभारंभ आज उनके हाथ हुआ जिनके पास सबका व्यवस्थागत नेतृत्व है. आज अशोक सिंघल और रामचंद्र परमहंस होते तो और अच्छा होता. जितना हो सके सबको साथ लेकर आगे चलने की विधि का अधिष्ठान आज बन रहा है.
सरसंघचालक ने कहा कि अभी कोरोना का दौर चल रहा है, सारा विश्व विचार कर रहा है कि कहां गलती हुई और कैसे रास्ता निकले. दो रास्तों को देख लिया, तीसरा रास्ता है क्या? तीसरा रास्ता हमारे पास है. प्रभु श्रीराम के चरित्र से देखेंगे तो पराक्रम, पुरुषार्थ और वीरत्व हमारे भीतर है. आज के दिन से हमें यह विश्वास और प्रेरणा मिलती है, इसमें कोई अपवाद नहीं है, क्योंकि सब राम के हैं और राम सबके हैं.
उन्होंने कहा कि भागवत ने कहा प्रभु श्रीराम हमारी रग-रग में हैं, उनको हमने खोया नहीं है. सब राम के हैं और सबमें राम हैं. इसलिए यहां अब मंदिर बनेगा और भव्य मंदिर बनेगा. सारी प्रक्रिया शुरू हो गयी है, दायित्व बांटे गए हैं जिसका जो काम है, वह करेंगे. यहां पर जैसे-जैसे मंदिर बनेगा, वैसे ही अयोध्या भी बनती चली जानी चाहिए और इस मंदिर के पूर्ण होने के पहले हमारा मन मंदिर बनकर तैयार रहना चाहिए. हमारा हृदय भी राम का बसेरा होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम जिस धर्म के विग्रह माने जाते हैं, वह सबको जोड़ने वाला, सबकी उन्नति मांगने वाला धर्म है. उसकी ध्वजा को फहराकर हम सबकी उन्नति चाहने वाला भारत बना सकें. हम सब लोगों को अपने मन की अयोध्या को सजाना है. हमारे मन मंदिर और हृदय में राम का बसेरा होना चाहिए. हमें सभी दोषों, विकारों और शत्रुता से मुक्त होना चाहिए.



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