साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था नवगीतिका लोक रसधार के तत्वावधान में रेलवे के अधिकारी दिलीप कुमार के नए काव्य संग्रह अप डाउन में फँसी जिंदगी पर परिचर्चा आयोजित हुई.
परिचर्चा में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार और आलोचक डॉ चंद्रदेव सिंह ने कहा कि ‘अप और डाउन’ हम सब की जिंदगी का एक हिस्सा है. सबकी जिंदगी में उतार और चढ़ाव आते रहते हैं. इस कविता संग्रह में कवि दिलीप कुमार ने अपने जीवन के पूरे संघर्ष और पीड़ा को, जिसे उन्होंने जिया है; अभिव्यक्त करने की सफल कोशिश की है. इसमें शास्त्रगत बातें कम हैं लेकिन सामाजिकता भरपूर है.
उन्होंने कहा कि यह संग्रह मानवता के खिलाफ खड़ी शक्तियों के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देती है और हमें एक बेहतर मनुष्य बनने के लिए प्रेरित करती है. धूमिल ने कविता को मानवता के पक्ष में लड़ने वाला हथियार बताया था. दिलीप कुमार की कविताएं भी ऐसा ही हथियार हैं.
इस अवसर पर आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की प्रोफेसर मीरा कुमारी ठाकुर ने कहा कि दिलीप कुमार की कविताएं नई पीढ़ी के लिए प्रेरक हैं. उन्होंने बहुत ही सरल और सहज ढंग से बहुत अच्छी कविताएं लिखी हैं जिसमें शैली, शब्द और वर्णन के साथ सटीक प्रतीकों का प्रयोग दृष्टिगत होते हैं. कविता आम लोगों तक पहुंचती है.
इस अवसर पर राजीव प्रियदर्शी ने कहा कि बिहार राष्ट्रकवि दिनकर और जानकी वल्लभ शास्त्री की धरती है. यहां पर कविता की अच्छी फसल होती है. दिलीप कुमार की कविताएं भी कथ्य और संदेश के आधार पर हिंदी साहित्य की प्रतिनिधि कविताएं बनने का दर्जा रखती है.
उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर के जीवन पर आधारित कविता का पाठ भी किया.
रेलवे अधिकारी और कवि दिलीप कुमार ने अपने कविता संग्रह अप डाउन में फंसी जिंदगी से अनेक कविताओं का पाठ किया, जिसमें जलती तो बाती है, दिल्ली जाने वाली सड़क, सरदार सरोवर में डूबे हुए पेड़, बारिश का पानी, जनपथ से राजपथ की दूरी और प्रेम का गणितीय फार्मूला को लोगों ने खूब पसंद किया.
संस्था की सचिव लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने धन्यवाद ज्ञापन किया. आयोजन के अवसर पर अनिल कुमार, गोपाल सिंह, देवांशु किशोर, मनोज कुमार, राजेश सिन्हा, मिंटू राणा, राजीव कुमार, सिद्धार्थ कुमार, शशि रंजन कुमार, केके ठाकुर आदि उपस्थित रहे.


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