नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार राफेल विमानों की पुरानी डील से तुलना करें तो राफेल विमानों का नया सौदा कर भारत ने 17.08% पैसा बचाया है. साथ ही पुरानी डील के मुकाबले नई डील में 18 विमानों की डिलीवरी का समय भी काफी बेहतर है.
कैग ने वायुसेना की खरीद से जुड़ी जो रिपोर्ट दी है, उसमें राफेल डील से जुड़े विवरण भी 16 पन्नों में शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि विमानों की पुरानी डील से तुलना करें तो 36 राफेल विमानों का नया सौदा कर भारत 17.08% पैसा बचाने में कामयाब रहा है. वहीं पुरानी डील के मुकाबले नई डील में 18 विमानों की डिलीवरी का समय भी काफी बेहतर है, शुरुआती 18 विमान भारत को जल्दी मिल जाएंगे.
कैग रिपोर्ट पेश होने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने लगातार कई ट्वीट कर कहा कि- “ऐसा नहीं हो सकता कि सुप्रीम कोर्ट भी गलत हो”, “CAG भी गलत हो” सिर्फ एक परिवार ही सही हो. राफेल पर CAG रिपोर्ट से सच की पुष्टि हुई. रिपोर्ट से ‘महाझूठबंधन’ के झूठों की पोल खुल गई है. सत्यमेव जयते. सच्चाई की हमेशा जीत होती है.
रिपोर्ट में कहा गया है, 126 विमानों के लिए किए गए सौदे की तुलना में भारत ने अपनी जरूरत के मुताबिक करवाए गए बदलावों के साथ 36 राफेल विमानों के सौदे में 17.08 फीसदी रकम बचायी. पहले 18 राफेल विमानों का डिलीवरी शेड्यूल भी पूर्व के प्रस्तावित शेड्यूल से बेहतर है. रिपोर्ट में कहा गया कि ऑडिट में पाया गया कि भारतीय वायुसेना ने ASQR (एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स) की परिभाषा ही तय नहीं की थी, फलस्वरूप कोई भी वेंडर ASQR का पूरी तरह पालन नहीं कर पाया.
कैग ने अपने रिपोर्ट में बताया कि प्रोक्योरमेंट प्रोसेस के दौरान ASQR लगातार बदले जाते रहे, इसकी वजह से तकनीकी तथा कीमत मूल्यांकन के समय दिक्कतें हुईं, तथा प्रतियोगी टेंडरिंग को नुकसान पहुंचा. रक्षा मंत्रालय की टीम ने मार्च 2015 में सिफारिश की थी कि 126 विमानों के सौदे को रद्द कर दिया जाए.
उधर राफेल की सौदेबाजी करने वाली टीम के अध्यक्ष रहे एयर मार्शल आर के एस भदौरिया ने कहा कि टीम के तीन सदस्यों ने कुछ सवाल उठाए थे और उन पर फाइनल रिपोर्ट में पूरी तरह से ध्यान दिया गया. इन सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों को विचार-विमर्श के तौर पर देखा जाना चाहिए, इसे असहमति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
राफेल डील पर CAG रिपोर्ट राज्यसभा में पेश होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं के साथ संसद के बाहर सुबह में प्रदर्शन किया.



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