आम चुनाव 2019 मे सभी पार्टी अपने मेनोफेस्टो में शहरी गरीबी के मुद्दो को शामिल करें ताकि स्लम बस्तियों मे रहने को विवश हाशिये पर खड़े समुदाय को भी मानव गरिमा के साथ जीने का हक मिल सके. ‘माई सीटी एलाइंस फॉर अर्बन पूअर’ पुरे बिहार मे हस्ताक्षर अभियान चलाकर बीस हजार हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन राष्ट्रीय चुनाव आयोग, महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित सभी राजनैतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को भेज रही है. संगठन ने इस क्रम में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं वशिष्ठ नारायण सिंह सांसद सह प्रांतीय अध्यक्ष जदयू से इस मुद्दे को पार्टी द्वारा अपने निश्चय योजना में शामिल करने के संदर्भ में बात भी की है.
दलित विकास अभियान समिति एवं IGSSS के सहयोग से ‘माई सीटी एलाइंस फॉर अर्बन पूअर’ जनसंगठन द्वारा शहरी गरीब व उनके मुद्दे पर हस्ताक्षर अभियान अंतर्गत आयोजित प्रेस वार्ता में टीम लीडर धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि शहरी गरीबों के बुनियादी सवाल के साथ बेघरों के लिए आवास, स्वच्छ भारत मिशन, लैगिंक समानता, घरेलू कामगार, शिक्षा एव स्वास्थ्य, निर्माण मजदूर एव स्मार्ट सीटी मे विस्थापन आदि मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संस्थान व जनसंगठन द्वारा लम्बी बहस के उपरांत शहरी गरीबों को सम्मान के साथ न्याय संगत अधिकार दिलाने के लिए सरकर कि प्रायोजित योजनाओं को अंतिम वर्ग तक पहुचाने के उद्देश्य से ‘माई सीटी एलाइंस फॉर अर्बन पूअर’ का स्थापना की गई है. इस नेटवर्क की स्थापना बिहार के 185 सामाजिक संगठनों व संस्थाओं तथा कामगार संगठनों ने मिलकर किया है. 185 सामाजिक संगठन नोडल प्रतिनिधि के रूप मे तथा 21 सदस्यीय कोर ग्रुप के रूप मे कार्यरत नेटवर्क ने निर्माण मजदूरों के अलावे शहरी गरीबी के पांच प्रमुख मुद्दे पर एक कार्यनीति बनायी है और राज्य सरकार के सहयोग से इस निमित्त रोड मैप तैयार किया जा रहा है.
स्थापना के क्रम में हुयी बहस के बीच नागरिकों कि जो कुछ प्रमुख मांग सामने आई, उसमें शहरी बेघरों पर एक राष्ट्रीय नीति, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा विकसित करना, बेघरों की पहचान सुनिश्चित करते हुए सभी कल्याणकारी योजनाओं तक उनको पहुंच प्रदान करना, बेघरों का अपराधीकरण करने का नजरिया बंद करना, मास्टर प्लान और स्मार्ट सिटी में बेघरों को शामिल करना, बेदखली शून्य करन, सभी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को जमीन का स्वामित्व प्रदान करना, SBM, SCM जैसी योजनाओं के साथ नीति अभिसरण सुनिश्चित करना, आवास और झुग्गी बस्ती सुधार की निगरानी के लिए समिति का गठन करना, स्लम के बच्चो को शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा सुनिश्चित करना, टाउन वेंडिंग कमिटियों (TVC) का सही निर्वाचन करना, वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन की पहचान करना, घरेलू कामगारों का वर्ष 2008 के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिनियम के तहत पंजीकृत करना, सभी निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण करना, निर्माण श्रमिकों पर राष्ट्रीय अधिनियम के लिए राष्ट्रीय अभियान समिति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को पूरी तरह लागू करना, प्रस्तावित श्रम संहिता से BOCW अधिनियमों को अलग करना तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रत्येक दो वर्षों में एक बार BOCW कल्याण बोर्ड और जिला कार्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण के दिशा-निर्देश और रूपरेखा को यथावत लागू करना शामिल है.


‘माई सीटी एलाइंस फॉर अर्बन पूअर’ के संरक्षक विद्यानंद विकल ने कहा कि यह जनसंगठन हाशिये पर रह रहे शहरी गरीबों को गरिमा के साथ बुनियादी सुविधाए उपलब्ध कराने और उनके निगरानी का कार्य करेगी. इस संदर्भ में सरकार के साथ पहलकदमी कि गई है और कम अवधि मे ही संगठन के प्रयास से शहर में उजड़ रही झोपड़ियों पर सरकार ने रोक लगाई है और नये सिरे से सर्वेक्षण कराकर उन्हे आवास उपलब्ध कराने कि दिशा मे कार्ययोजना तैयार कर रही है. शहरी गरीबो के लिए कई महत्वकाक्षी योजना हैं परंतु लोगो तक वो पहुच नहीं पा रही हैं. स्मार्ट सीटी मे स्लम वस्ती अधिनियम को विलोपित कर वहाँ रह रहे लोगों की अनदेखी की जा रही है.
स्वश्छ भारत मिशन, शहरी एवं आवास विभाग, बिहार सरकार के टीम लीडर अनिल कुमार गुप्ता के अनुसार अल्पावधि में ही संगठन काफी उपयोगी और सार्थक सिद्ध हुआ है. इसने स्लम वस्ती मे स्वच्छता अभियान के साथ ही कचरा प्रबंधन और उसके उठाव के क्षेत्र मे सार्थक प्रचार-प्रसार किया है. संगठन द्वारा सफाई कर्मी को कचरा उठाव और सफाई के प्रक्रिया और उससे बचाव को लेकर प्रशिक्षण की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत स्लम क्षेत्र के तकरीबन एक लाख लोगो को प्रशिक्षित कर उन्हे आजीविका से जोड़ने के लिए कार्य होगा. संगठन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े समुदाय तक सरकार के योजना की पहूँच स्थापित करने मे पैरोकार के रूप मे कार्य करेगी.
यह नेटवर्क सभी नगर पंचायत एव नगर निगम में स्लम विकास समिति स्थापित कर उन्हें मौलिक अधिकार उपलब्ध कराने के लिए कार्य करेगी. साथ ही सभी लेबर अड्डों पर सामाजिक अंकेक्षण कार्यक्रमों के तहत सरकार की प्रद्त योजनाओं से उनको जोड़ने का कार्य करेगी. ज्ञात है कि निर्माण मजदूरों की समस्याओं को देखने एवं उनकी समस्याओ में सहयोग प्रदान करने के लिए किसी प्रकार कि हेल्पडेस्क नहीं है, संगठन सभी जगहो पर हेल्पडेस्क स्थापित करेगी. प्रेस वार्ता में विद्यानंद विकल, धर्मेन्द्र कुमार, अनिल कुमार गुप्ता के अलावे विश्वरंजन, विकास कुमार सिंह, शशि भूषण प्रसाद, महेन्द्र कुमार रौशन, सागर डोमनिक, बबीता कुमारी एवं माधुरी कुमारी ने अपनी बात रखी.



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