जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में 9 फरवरी 2016 को भारत विरोधी नारे लगाने के मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पटियाला हाउस के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमीत आनंद की कोर्ट में बारह सौ पन्नों की चार्जशीट दायर कर दी.
पुलिस ने चार्जशीट में JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य एवं सात कश्मीरी छात्रों सहित कुल दस लोगों को आरोपी बनाया है. इनपर आतंकी अफजल गुरु की याद में किए गये इस प्रोग्राम में देश विरोधी नारे लगाए जाने का आरोप है. उमर खालिद के खिलाफ धोखाधड़ी का भी मामला दर्ज किया गया है. चार्जशीट में CPI नेता डी राजा की बेटी अपराजिता राजा, पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष शहला रशीद समेत 36 अन्य नाम भी चार्जशीट के कॉलम 12 में हैं. इन सभी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. पटियाला कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी.
कन्हैया कुमार ने कहा कि मैं तीन साल बाद चार्जशीट दाखिल किए जाने पर मोदीजी और उनकी पुलिस को धन्यवाद देना चाहता हूँ. इससे साफ है कि यह राजनीति से प्रेरित कदम है. मैं अपने देश की न्यायपालिका पर विश्वास करता हूँ. मामले में ABVP के कार्यकर्ताओं और जेएनयू के सुरक्षाकर्मियों को गवाह बनाया गया है.
CPI नेता डी राजा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ये राजनीति से प्रेरित आरोप हैं, कोई भी AISF पर देश के विरोध में काम करने का आरोप नहीं लगा सकता. जांच के लिए कुछ भी नहीं है, हमारे छात्र इस तरह की किसी भी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं.
JNU में 9 फरवरी को लेफ्ट स्टूडेंट्स के ग्रुप्स ने संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में एक प्रोग्राम कल्चरल इवेंट के नाम से ऑर्गनाइज किया गया था. उसी प्रोग्राम में शाम 5 बजे कुछ लोगों ने देशविरोधी नारेबाजी की थी. दस फरवरी को टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर भारत विरोधी नारों की वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दिल्ली के वसंतकुंज थाने में धारा 124A के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज कराया था. जाँच के दौरान मामले में कन्हैया, खालिद और भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था. जिन्हें बाद में जमानत मिल गई थी.
चार्जशीट में शामिल सात कश्मीरी छात्रों में आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशरत अली, और खलिद बशीर भट देशद्रोह के आरोपी बनाये गये हैं. शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने JNU के तत्कालीन स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया था और उमर खालिद अंडरग्राउंड हो गया था. इन दोनों के अलावा बनज्योत्स्ना लाहिड़ी, अनिर्बान भट्टाचार्य, रुबीना सैफी, रामा नागा, आनंद और रेयाज़ उल हक़ का नाम भी वीडियो के आधार पर FIR में शामिल किया गया था. बाद में जुलाई 2016 को स्पेशल सेल ने पांच कश्मीरी युवाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया था. पुलिस ने तीन कश्मीरी युवाओं से पूछताछ भी की थी, जिनमें से दो JNU के छात्र थे. अप्रैल 2017 में पुलिए ने JNU के 31 छात्रों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया था.
पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि इस कार्यक्रम के लिए अनुमति की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था और जब उन्हें रोका गया और बताया गया कि इस तरह के किसी कार्यक्रम की आपके पास अनुमति नहीं है तो कन्हैया कुमार आगे आ गए और सुरक्षा अधिकारी से बहस करने लगे जिसके बाद भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी.



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