केंद्र सरकार 5 लाख रुपये की सलाना कमाई करने वाले लोगों को इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर रही है. 1 फरवरी को पेश होने जा रहे मोदी सरकार के अंतरिम बजट में इसकी घोषणा हो सकती है.
मौजूदा टैक्स स्लैब में फिलहाल 2.5लाख रुपये तक की सालाना आय कर मुक्त है, जबकि 2.5 से 5 लाख रुपये की आय पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है. इसके बाद 5 से 10 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 फीसदी दर से टैक्स देना होता है.


सरकार छोटे टैक्सपेयर्स को रियात और राहत है वो अप्रत्यक्ष तौर पर नहीं बल्कि सीधे देगी दिया जाएगा. इसके लिए सरकार कई अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है. विकल्प के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ सकता है, अभी 40,000 रुपये का सालाना स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. पहले स्लैब में टैक्स दरें घटाने का विकल्प भी है. सूत्रों के मुताबिक 5 फीसदी, 20 फीसदी, 30 फीसदी के बीच की एक नई दर भी आ सकती है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने व्यक्तिगत इनकम टैक्सपेयर्स को विनिर्दिष्ट निवेश योजनाओं में निवेश पर धारा 80C के तहत मिलने वाली छूट को बढ़ा कर 3 लाख रुपये करने की भी सिफारिश की है. फिक्की का कहना है कि इससे व्यक्तिगत बचत को प्रोत्साहन मिलेगा.
सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन का बिल इसी हफ्ते संसद में पास हुआ। इसमें 8 लाख तक सालाना आय वालों को गरीब मानकर आर्थिक आधार वाले आरक्षण का पात्र माना गया है। कांग्रेस का कहना है कि अगर आठ लाख तक की आय वाले लोग गरीब हैं तो उनसे आयकर क्यों लिया जा रहा है।

मौजूदा टैक्स स्लैब

सालाना आय टैक्स दर
2.5 लाख रुपए            शून्य
2.5 से 5 लाख रुपए         5%
5 से 10 लाख रुपए        20%
10 लाख रुपए से ज्यादा  30%



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