सामान्य वर्ग के गरीब अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण लागू करने वाला गुजरात पहला राज्य बन गया. गुजरात सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसद आरक्षण देन प्रारम्भ कर दिया.
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण को आजादी के बाद का बड़ा ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए इसे 14 जनवरी से लागू करने का एलान किया. इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के गुजरात सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से इसकी वजह और इसे लागू करने की प्रक्रिया के बारे में बताना चाहिए. जल्दबाजी में किए गए इस एलान से अभ्यर्थियों में भ्रम पैदा होगा.
नरेंद्र मोदी की केन्द्रीय सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर पिछले दिनों आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ कर दिया था और शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा संविधान संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से यह कानून बन चुका है. नए कानून के तहत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण मिलेगा.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सात जनवरी को आरक्षण के बिल को मंजूरी दी थी, इसे आठ जनवरी को लोकसभा और नौ जनवरी को राज्यसभा से पास किया गया. गुजरात में अप्रैल 2015 से ही पाटीदार समाज आरक्षण की मांग कर रहा है. राजस्थान में गुर्जर, महाराष्ट्र में मराठा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सवर्ण समुदाय आरक्षण की मांग करता आ रहा है. अब आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण लागू किए जाने के बाद पाटीदार समाज के कुछ लोग OBC के तहत आरक्षण की मांग उठा रहे हैं.
अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित कोटे के अतिरिक्त आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसद आरक्षण शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में दिया जाएगा. यह आरक्षण उन सारे भर्तियों पर लागू होगा, जिनकी भर्ती प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुयी है. जिन भर्तियों के लिए लिखित, मौखिक और कंप्यूटर परीक्षा ली जा चुकी है, उन पर यह लागू नहीं होगा.
आरक्षण का लाभ ऐसे परिवार के सदस्य पर लागु होगा जिनकी सालाना आय आठ लाख या उससे कम होगी, जिनके पास पांच एकड़ या उससे कम कृषि योग्य भूमि है, ऐसे परिवार, जिनके पास एक हजार वर्ग फीट या उससे कम का मकान है, अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में जिनके पास 100 गज का प्लॉट है, गैर-अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में 200 या उससे कम का प्लॉट है या जो अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे.



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