सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एके सीकरी ने कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है. उन्होंने इस ट्राइब्यूनल में जाने के लिए दी गई अपनी सहमति वापस लेते हुए विधि सचिव को एक पत्र में लिखा है कि वो हाल की कुछ घटनाओं से काफ़ी दुखी हैं. कृपया इस प्रस्ताव को आगे ना बढ़ाएं.
जस्टिस एके सीकरी आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटाने से जुड़े सेलेक्शन पैनल में शामिल थे, जिसने दो-एक के बहुमत से उन्हें पद से हटाने का फ़ैसला किया था. इस फ़ैसले के बाद ये बात कही गई कि आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री के साथ खड़े होने की वजह से जस्टिस सीकरी को फ़ायदा मिला है और सरकार ने उनके एक अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल का हिस्सा बनने के लिए सहमति दे दी है.
जस्टिस सीकरी इन ख़बरों से काफ़ी परेशान रहे और उन्होंने विधि सचिव को एक पत्र लिखा कि वो हाल की कुछ घटनाओं से काफ़ी दुखी हैं. जिस तरह के विवाद को हवा दी गई और जो घटनाएं हुईं उन्होंने मुझे काफ़ी दुखी कर दिया है. मैं इस ट्राइब्यूनल में जाने के लिए दी गई अपनी सहमति वापस लेता हूं. कृपया इस प्रस्ताव को आगे ना बढ़ाएं.
जस्टिस सीकरी ने लिखा है कि मैंने दिसंबर में कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल के लिए अपनी सहमति दे दी थी और उसके बाद से कोई सुनवाई भी नहीं की है. मुझे बताया गया था कि इस काम में प्रशासनिक विवादों का निपटारा करना होता है और उसके लिए कोई नियमित वेतन नहीं है.
आलोक वर्मा को हटाने के बाद जस्टिस एके सीकरी की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शुरू से ही बहुचर्चित जस्टिस काटजू, जस्टिस सीकरी के पक्ष में खड़े नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि था कि ‘मैं जस्टिस सीकरी को अच्छी तरह से जानता हूँ, क्योंकि मैं दिल्ली उच्च न्यायालय में उनका मुख्य न्यायाधीश था और मैं उनकी ईमानदारी की गारंटी ले सकता हूँ. उन्होंने तब तक निर्णय नहीं लिया होगा, जब तक उन्हें आलोक वर्मा के खिलाफ रिकॉर्ड में कुछ मजबूत तथ्य नहीं मिले होंगे. मुझे नहीं पता वो तथ्य क्या हैं, लेकिन मैं जस्टिस सीकरी को जानता हूं, और व्यक्तिगत तौर पर कह सकता हूँ कि वह किसी से भी प्रभावित नहीं हो सकते. जो भी उनके बारे में कहा जा रहा है वह गलत और अनुचित है.’



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