CBI के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया. इसके पूर्व एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उन्हें CBI निदेशक के पद से हटा दिया था. जस्टिस काटजू ने कहा कि मैं जस्टिस सीकरी की ईमानदारी की तारीफ करता हूँ, वो किसी से प्रभावित नहीं हो सकते हैं. उन्होंने बिना किसी सबूत के वर्मा के खिलाफ फैसला नहीं लिया होगा.
प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से वर्मा को CBI प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया था. मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी वर्मा को पद से हटाने के पक्ष में थे, जबकि खड़गे ने इसका विरोध किया. उच्चतम न्यायालय ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने के विवादास्पद सरकारी आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया था, लेकिन उन्हें उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की CVC जांच पूरी होने तक कोई बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से रोक दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि वर्मा के खिलाफ कोई भी अगला निर्णय उच्चाधिकार प्राप्त समिति ही लेगी जो CBI निदेशक का चयन और नियुक्ति करती है.
इसके दुसरे दिन आलोक वर्मा ने इस्तीफा देते हुए अपने त्याग-पत्र में लिखा कि यह ‘सामूहिक आत्ममंथन’ का समय है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के सचिव को भेजे गए अपने इस्तीफे में वर्मा ने लिखा कि यह भी गौर किया जाए कि अधोहस्ताक्षरी 31 जुलाई 2017 को ही रिटायर हो चुका था और 31 जनवरी 2019 तक CBI के निदेशक के तौर पर अपनी सेवा दे रहा था, क्योंकि यह तय कार्यकाल वाली भूमिका होती है. अधोहस्ताक्षरी अब CBI निदेशक नहीं है और महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद के लिहाज से पहले ही सेवानिवृति की उम्र पार कर चुका है, अत: अधोहस्ताक्षरी को आज से सेवानिवृत समझा जाए.
इससे पहले पद से हटाये जाने के बाद आलोक वर्मा ने कहा था कि झूठे, अप्रमाणित और बेहद हल्के आरोपों को आधार बनाकर उनका ट्रांसफर किया गया. CBI भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है, जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए. मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
CBI में चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर पोस्ट लिख बताया है कि जस्टिस सीकरी ने वर्मा को पद से क्यों हटाया. उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने मुझसे पूछा कि वर्मा को कमेटी के सामने अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला. इसके बाद मैंने जस्टिस सीकरी को आज सुबह फोन किया और पूछा कि इस पर आपको क्या कहना है. उन्होंने जो कहा उसको फेसबुक पर लिखने की इजाजत भी मैंने उनसे ली.
बातचीत में जस्टिस सीकरी ने कहा कि CVC के सामने जो सबूत आए थे, उसके आधार पर उसने आलोक वर्मा के ऊपर पहले ही आरोप लगाए थे और वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था. CVC द्वारा वर्मा को दोषी पाए जाने के बाद जस्टिस सीकरी का मानना था कि वर्मा को CBI निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर नहीं होना चाहिए.


जस्टिस काटजू ने अपने पहले पोस्ट में लिखा था कि आलोक वर्मा को CBI निदेशक के पद से हटा दिया गया. इसका फैसला प्रधानमंत्री मोदी की अध्ययक्षता वाली 3 सदस्यीय कमेटी ने किया. प्रधानमंत्री और सीकरी ने वर्मा को हटाने का फैसला किया, मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया. फैसले के बाद मेरे पास कई फोन आएं, लोगों ने पूछा कि मेरा इस पर क्या कहना है. मैं जस्टिस सीकरी को बहुत अच्छे से जानता हूँ क्योंकि मैं दिल्ली हाइकोर्ट में उनका चीफ जस्टिस था. मैं उनकी ईमानदारी की तारीफ करता हूँ. उन्होंने बिना किसी सबूत के वर्मा के खिलाफ फैसला नहीं लिया होगा. वो किसी से प्रभावित नहीं हो सकते हैं. उनके ऊपर किसी भी तरह के आरोप लगाना गलत है.
वर्मा को CBI के निदेशक पद से हटाने पर कांग्रेस ने जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार की ‘हताशा’ है ‘क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राफेल जेट सौदे में कोई जांच नहीं चाहते हैं. कांग्रेस ने ट्वीट किया कि- आलोक वर्मा को उनका पक्ष रखने का मौका दिए बिना, उन्हें पद से हटाकर PM ने एक बार फिर दिखाया है कि वह जांच से बहुत डरते हैं, चाहे वह स्वतंत्र CBI निदेशक द्वारा की जाए या संसद द्वारा JPC के माध्यम से की जाए.
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री की भूमिका में हितों के टकराव की बात कही क्योंकि प्रधानमंत्री उस तीन सदस्यीय समिति का हिस्सा हैं, जिसने वर्मा को पद से हटाया है. मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने वर्मा को बिना सुनवाई के जल्दबाजी में हटा दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि राफेल घोटाले में मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की संभावना है.
राज्यसभा सदस्य अधिवक्ता मजीद मेमन ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ चयन समिति का फैसला पूरी तरह से ‘सत्ता का अतिक्रमण’ है. समिति को उनकी बात सुननी चाहिए थी, CVC की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.
कांग्रेस नेता व अधिवक अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्मा को आरोपों के आधार पर हटा दिया गया, जबकि CVC की कोई विश्वसनीयता नहीं है. प्रधानमंत्री इस बात से आशंकित हैं कि उनके खिलाफ जांच होने पर कई सबूत सामने आएंगे.



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