सवर्णों को नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने से जुड़े विधेयक को यूथ फॉर इक्वैलिटी नाम के NGO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी है.
राज्यसभा ने एक दिन पहले ही इससे जुड़ा 124वां संविधान संशोधन विधेयक पास किया था. विधेयक अभी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाना भी बाकी है. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही विधि मंत्रालय इसे अधिसूचित करेगा. विधेयक के कानून बनने में अभी भी रोड़ा अटक सकता है.
1950 के बाद यह संविधान का 124वां संशोधन बिल है. इसके पूर्व छह ऐसे मौके आए हैं जब सुप्रीम कोर्ट को लगा है कि संविधान में किया गया संशोधन असंवैधानिक है, इस लिए नये बिल निरस्त कर दिए जाएँ. सबसे ताजा उदाहरण जजों की नियुक्ति के लिए आयोग के गठन का है. सरकार ने अप्रैल 2015 में इसके लिए संविधान में संशोधन किया था. अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कॉलेजियम प्रणाली बहाल कर दी थी.
राज्यसभा में बुधवार को करीब 8 घंटे हुई चर्चा में 30 से ज्यादा नेताओं ने अपनी बात रखी थी. NDA विरोधी लगभग हर दल ने बिल का विरोध करते हुए सरकार से तीखे सवाल भी किए थे. लेकिन चर्चा के बाद इसके पक्ष में वोटिंग की, फलस्वरूप बिल के पक्ष में 165 सांसदों ने और बिल के विरोध में 7 सदस्यों ने वोटिंग की थी.
चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा था कि अगर 8 लाख रुपए कमाने वाला गरीब है तो सरकार को 8 लाख तक की कमाई पर इनकम टैक्स भी माफ कर देना चाहिए. इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्य चाहें तो 8 लाख रुपए की सीमा को घटा-बढ़ा सकते हैं, यह आरक्षण राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा.



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