पटना की नयी SSP गरिमा मलिक की धमक पूरे जिले में सुनाई देने लगी है. वैसे तो उनकी पोस्टिं पटना में होते ही पुलिस महकमे में बैचैनी नजर आने लगी थी, पर उनके कड़क एक्शन और बेलाग निर्देशों के बाद तो पूरी कार्यप्रणाली ही बदली हुई नजर आने लगी है.
जिले में बारह घंटे के भीतर पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों से आधा दर्जन हत्याकांडों में फरार चल रहे ग्यारह नामजदों को गिरफ्तार किया. साथ ही चार लूट और डकैती सहित अन्य संगीन मामलों में वांछित 56 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
उनके द्वारा अपने मातहतों पर थोड़ी कड़ाई करते ही SP और DSP से लेकर थानेदारों तक की पूरी फौज छापेमारी में जुट गयी है.
SSP के कार्य पद्धति की एक झलक मात्र इस बदलाव की पूरी कहानी बता देगी. नौबतपुर में एक ब्रिज निर्माण कंपनी के ठेकेदार से रंगदारी की मांग और फायरिंग मामले को गंभीरता से लेते हुए SSP ने DSP को साफ शब्दों में कहा कि गोलीबारी कहीं भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 24 घंटे में टॉप टेन में शामिल सभी अपराधियों को सलाखों के पीछे किया जाए.
नौबतपुर गोलीबारी के बारे में SSP को बताया गया कि संबंधित ठेकेदार ने इस मामले में केस ही नहीं किया, जिसपर SSP ने निर्देश दिया कि रंगदारी के लिए फायरिंग हुई तो पुलिस के बयान पर केस दर्ज होगा. इसी प्रकार जनता की फरियाद सुनने को एक रुटीन के तौर पर नहीं करते हुए “गरिमामय” ढ़ंग से उसका निपटारा भी हो रहा है.
शाहपुर थाना क्षेत्र से एक मां अपनी बेटी के साथ आवेदन लेकर एसएसपी के पास पँहुचती है. उसका आरोप था कि पति और देवर मारपीट करते हैं, केस भी दर्ज है. परन्तु थाने की पुलिस कहती है तुम्हारा केस बंद हो गया है, चार्जशीट कोर्ट में भेज दिया गया है. SSP ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शाहपुर थाने में फोन कर जानकारी ली. थानेदार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, मामला पारिवारिक है. यह जवाब सुनते ही SSP अपने रौद्र रूप में आ गयीं. फोन पर ही थानेदार को फटकार लगाते हुए पूछा कि पीड़िता को क्यों बताया गया कि चार्जशीट हो गया? अगली बार फोन नहीं करूंगी, सीधे एक्शन होगा.



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