ISRO ने दक्षिणी अमेरिका के फ्रेंच गुयाना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से अपने अब तक के सबसे वजनी उपग्रह GSAT-11 का प्रक्षेपण किया.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के करीब 5,854 किलोग्राम वजन वाला GSAT-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा. इस सैटेलाइट को इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए गेम चेंजर कहा जा रहा है. इस सैटेलाइट के काम शुरू करने के बाद देश में इंटरनेट स्पीड में क्रांति आ जाएगी, इसके जरिए हर सेकंड 100 गीगाबाइट से ऊपर की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी.
GSAT-11 में 40 ट्रांसपोर्डर कू-बैंड और का-बैंड फ्रीक्वेंसी में है, जिसकी सहायता से हाई बैंडविथ कनेक्टिविटी 14 गिगाबाइट/सेकेंड डेटा ट्रांसफर स्पीड संभव है. इसकी खास बात है कि यह बीम्स को कई बार प्रयोग करने में सक्षम है, जिससे पूरे देश के भौगोलिक क्षेत्र को कवर किया जा सकेगा. इससे पहले के लॉन्च सैटलाइट में ब्रॉड सिंगल बीम का प्रयोग किया गया था जो इतने शक्तिशाली नहीं होते थे कि बहुत बड़े क्षेत्र को कवर कर सकें. इसमें चार उच्च क्षमता वाले थ्रोपुट सैटलाइट हैं, जो अगले साल से देश में हर सेकंड 100 गीगाबाइट से ऊपर की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देकर ग्रामीण भारत में इंटरनेट क्रांति लाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएंगे.



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